इश्क में मिला धोखा, अपनों ने भी फेरा मुंह… नारी निकेतन बना सहारा, बेसहारा बेटियों की कहानियां कर देंगी भावुक

प्यार में साथ जीने-मरने के वादे, शादी के हसीन सपने और एक बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर घर की दहलीज लांघने वाली कई युवतियों का सफर बरेली के नारी निकेतन और वन स्टॉप सेंटर पर आकर ठहर गया है. यहां रह रही कई बेटियों की कहानियां इतनी दर्दनाक हैं कि किसी की भी आंखें नम हो जाएं. कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी आज इन लड़कियों के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा है कि वे अब यहाँ से बाहर निकलकर कहां जाएं और किसे अपना कहें. 

नारी निकेतन की चारदीवारी के पीछे रह रही एक युवती असम की रहने वाली है, जिसकी दास्तान इंसानियत को शर्मसार करती है. वो अपने प्रेमी के झूठे जाल में फंसकर अपना पूरा परिवार और राज्य छोड़कर बरेली चली आई थी. 

चंद दिनों तक साथ रखने के बाद उस हैवान प्रेमी ने युवती का सौदा किसी अन्य व्यक्ति से कर दिया और पैसे लेकर फरार हो गया. पुलिस ने किसी तरह युवती को रेस्क्यू कर नारी निकेतन पहुंचाया. अब वह पिछले कई महीनों से अदालती आदेश के इंतजार में दिन काट रही है, लेकिन उसे डर है कि बाहर की दुनिया में उसका कोई सहारा नहीं है. 

NEET की तैयारी कर रही छात्रा भी हुई शिकार

एक अन्य मामला पीलीभीत की रहने वाली एक मेधावी छात्रा का है, जो डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट (NEET) की तैयारी कर रही थी. पढ़ाई के दौरान ही वह बरेली के एक युवक के संपर्क में आई. युवक ने शादी का झांसा देकर उसे अपने पास बुला लिया. लेकिन जब शादी की बात आई, तो उसने समाज और परिवार की प्रतिष्ठा का बहाना बनाकर पैर पीछे खींच लिए. समाज और परिवार के डर से युवती में घर लौटने का साहस नहीं बचा, जिसके बाद उसने अपनी सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर का दरवाजा खटखटाया.

कोर्ट मैरिज के बाद मिला धोखा, बिखर गए सपने

दिल्ली और लखनऊ की दो अन्य युवतियों की कहानियां भी कम दर्दनाक नहीं हैं, जो रिश्तों के खोखलेपन को बयां करती हैं. दिल्ली की एक युवती ने बरेली के युवक से बकायदा कोर्ट मैरिज की थी. दोनों साथ रह रहे थे, लेकिन जैसे ही युवती गर्भवती हुई, बात परिवारों तक पहुंच गई. परिवार के दबाव में आकर पति ने उससे दूरी बना ली. फिलहाल, वन स्टॉप सेंटर में दोनों पक्षों की काउंसलिंग चल रही है. लखनऊ की एक अन्य युवती, जिसके माता-पिता अलग हो चुके थे, अकेलेपन के कारण एक युवक के झांसे में आकर घर छोड़ बैठी. वह अब नारी निकेतन में है. उसका कहना है कि सगी मां तो कभी मिलने भी नहीं आती, लेकिन केंद्र की अधीक्षिका में उसे मां जैसा अपनापन मिलता है, इसलिए वह अब घर नहीं जाना चाहती.

प्रशासन कर रहा पुनर्वास की कोशिश

इन बेसहारा हो चुकी बेटियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने और उन्हें सुरक्षित माहौल देने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है. जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) मोनिका राणा ने बताया कि आश्रय गृह में आने वाली प्रत्येक युवती की मानसिक काउंसलिंग की जाती है. उनके परिजनों से संपर्क कर उन्हें दोबारा सुरक्षित माहौल दिलाने का प्रयास किया जाता है. कई मामलों में परिवार लड़कियों को अपनाने से साफ इनकार कर देते हैं, जिससे चुनौती बढ़ जाती है. प्रशासन न्यायालय के आदेश और स्वयं युवती की लिखित सहमति के बाद ही उनके सुरक्षित पुनर्वास की अंतिम कार्रवाई सुनिश्चित करता है.

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