जनमुद्दा विशेष

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खैरागढ़ के विकास में राजनीति हाशिए पर, सामाजिक संगठनों ने संभाला मोर्चा

Date : 30-Oct-2020

 

0 पांच साल के लिए चुनकर आए जनप्रतिनिधि सरकारी पैसों के भरोसे, सामाजिक संगठन अपने बूते पर बदल रहे खैरागढ़ की तस्वीर 

खैरागढ़। छोटे—छोटे कार्य जिनके लिए महीनों कागजी कार्रवाई के इंतजार के बाद लाखों रूपए फूंके जाते हैं, वह अब चंद रूपयों में जनसहयोग और श्रमदान से पूरा हो रहा है। सौदर्यीकरण, पौधारोपण, मानव सेवा, गो—सेवा समेत शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी संवारने का जिम्मा आम जनता ने उठा लिया है। खासकर युवा पीढ़ी बढ़—चढ़कर सामने आ रही है। पिछले डेढ़ सालों में शहर सकारात्मक विकास की ​दिशा में बढ़ रही है। खुशी की बात यह है कि इसका नेतृत्व जनता खासकर युवा कर रहे हैं। 

    राजनीति पीछे छूट रही है। सेवाभाव जीतता नजर आ रहा है। जी हां, भाव...... वही भाव जिसके होने से जागरूक जनता एकजुट हो जाती हैं। वही भाव जिसके होने से नेताओं और अधिकारियों के आश्वासन का इंतजार नहीं करना पड़ता। मुट्ठीभर लोग मिलते हैं, आपसी विमर्श करते हैं। मौखिक योजनाएं तैयार होती है। एक राय होकर निर्णय लिया जाता है और काम शुरू हो जाता है। इन्ही कार्यों के लिए जनप्रतिनिधि मांग पत्र पेश करते हैं. प्रस्ताव बनाया जाता है, प्रशासनिक, तकनीकी. वित्तीय स्वीकृति होती है। टेंडर जारी होता हैं। चहेते ठेकेदारों को उपकृत किया जाता है। कमीशन और हिस्सेदारी तय की जाती है। ... फिर काम शुरू होता है। तब तक महीनों और अरसा गुजर जाता है। काम पूरा होता है, गुणवत्ता जैसे शब्द अर्थहीन हो जाते हैं। 

      खैरागढ़ की धरती में इन दिनों निर्मल त्रिवेणी अभियान, श्री राम गोसेवा समिति, गोकुल नगर स्वयं सेवा समिति, संकल्प युवा क्रांति संगठन, पहल 'एक नई सोच', शांति दूत, इकरा फाउंडेशन जैसे कई अन्य सामाजिक संगठनों के सेवा कार्यों के सामने राजनीति बौनी साबित हो रही है।
             शहर के बीच से गुजरते स्टेट हाईवे के बगल में रंगी खूबसूरत दीवारें, छायादार व आयुर्वेद पौधों का रोपण हो। नदी व उसकी घाटों की सफाई व रंगाई हो। यह कार्य निर्मल त्रिवेणी अभियान पूरे शिद्दत से कर रहा है। शहर में वाहनों से दुर्घटनाग्रस्त घायल गायों की सेवा व उपचार की बात करें तो  पूरे जिले में  खैरागढ़ अग्रणी भूमिका निभा रहा है। जहां एक ओर सरकारी गो—शालाओं में सैकड़ों मवेशी भूख से मर जाते हैं वहां उमराव पूल के पास बने श्री राम गोसेवा समिति के गोशला में घाायल मवेशियों का ईलाज भी किया जा रहा है वहीं उन्हे पेट भर चारा भी खिलाया जा रहा है। नया ​टिकरापारा में सैकड़ों सालों से जर्जर मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए नेताओं ने पहल नहीं की लेकिन श्री राम गो सेवा समिति ने जन सहायोग से इसे पूरा करने जा रहा है। इस तरह से धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहजने का काम भी वे बखूबी कर रहे हैं।  गोकुल नगर में स्वयं सेवा समिति लॉक डाउन में मोहल्ले के बच्चों को पढ़ाकर एक शानदार उदाहरण पेश कर रहे हैं। वहीं कोरोना के वैश्विक महामारी में पहल एक नई सोच व शांति दूत ने जैन समाज के सहयोग से गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था की। इकरा फाउंडेशन गरीब बच्चों को शिक्षा देने का अभियान छेड़े हुए है। 

         यही नहीं कई ऐसे भी संगठन और व्यक्ति विशेष  लोग है जो अपने सेवा कार्यों को सार्वजनिक करने की बजाय गोपनीय तरीके से समाज सेवा के कार्य में जूटे हुए हैं। गुजराती भोजनालय हो या कल्लू यादव... ये कोरोना कॉल जैसे संकट के दौर में निशुल्क भोजन पकाकर एक ​मिशाल पेश की है। पिपरि​या में नवजवानों का संगठन संकल्प युवा क्रांति संगठन भी अपने क्षेत्र में पर्यावरण और जनता की समस्याओं से जुड़े छोटी—छोटी समस्याओं के बड़ा होने से पहले उनके समाधान में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 

               शहर की सरकार नगर पालिका परिषद के जनप्रतिधि व प्रशासनिक अमला चाहे तो शहर की बदहाल तस्वीर को बदल सकती है लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में कुछ नहीं कर पा रही है। सवाल यह भी उठता है कि जब महज एक—डेढ़ सालों में चंद सामाजिक संगठन आपसी सहयोग और श्रमदान कर शहर की तस्वीर बदल सकते हैं, तो पांच साल के लिए चुनकर आए नेता केवल सरकारी पैसों के भरोसे ही विकास करेंगे, यह सोचकर क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

                      नगर पालिका प्रशासन अपने उत्तरदायित्व निभाने में फेल क्यों नजर आ रहा है। भ्रष्टाचार का दीमक पालिका को क्या ढक चुका है! जनप्रतिनिधि मौन साधे हुए है। अफसरों की मनमानी चल रही है। यह जरूर शुभ संकेत है कि समाजिक संगठन शहर के विकास के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन नगर पालिका व जनप्रतिनिधियों के लिए यह चिंतन का विषय है कि वे जब जनता के प्रतिनिधि हैं तो वे क्यों जनता को साथ लेकर समाज कार्य में नहीं जूट रहे हैं। सच्चाई यही है कि जनप्रतिनिधियों के साथ केवल कार्यकर्ता जुड़े हैं। आम जनता अपने नेता का इंतजार कर रही है। वह अपना रहनुमा ढूंढ रही है। जनता अपने दर्द को बया नहीं कर पा रही है। सारी राजनीति मीडिया, सोशल मीडिया में ही दिख रही है। सड़कें सूनी है। सन्नाटा पसरा हुआ है। सब खामोश है। सिसकते लोगों को कोई सुनने वाला नहीं है। जनता के दर्द को उनकी समस्याओं को आवाज देने वाला कोई नेता नजर नहीं आ रहा है।

''राममनोहर लोहिया जी ने कहा था, अगर सड़कें खामोश हो गई्ं, तो संसद आवारा हो जाएगी।''

कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच अपना फर्ज निभा रहे मीडियाकर्मी - IG रतनलाल डांगी

Date : 21-Apr-2020

कोरोना महामारी के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर अपना फर्ज निभा रहे मीडियाकर्मियों का सरगुजा पुलिस रेंज के IG रतनलाल डांगी ने पत्र लिखकर सराहना की है. उन्होंने कहा – कोविड 19 से संक्रमित होने का खतरा बना रहता है लेकिन मीडियाकर्मी अपने फर्ज को तरजीह देकर अपना चौथे स्तंभ का दायित्व निभा रहे हैं।

उन्होंने लिखा -

     “साथियों आपको यह तो अवगत होगा ही कि आज न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया मे कोविड 19 जैसी महामारी ने अपने पांव पसार कर एक बार फिर से इंसान को चुनौती दी है। इस महामारी से कई लाखों लोग संक्रमित हुए है तथा एक लाख से भी ज्यादा लोग इसकी चपेट मे आ गए हैं।
    इस महामारी से बचाने के लिए दुनिया के देशों के साथ हमारे यहां भी लाकडाउन चल रहा है। जिसमें न केवल हवाई जहाज बल्कि ट्रेन, बस टैक्सी आटो ,रिक्शा सब कुछ थम गए है, लेकिन समाज का एक वर्ग हैं जो स्वास्थ्यकर्मियों,पुलिस कर्मियों, सफाईकर्मी और प्रशासनिक कर्मियो के अतिरिक्त भी है जो उतनी ही सक्रियता से बिना थके अपना फर्ज निभा रहा है और वो है मिडिया कर्मी (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक,वेब पोर्टल) ।
मिडिया के साथी भी कोरोना योद्धाओं की तरह मैदान में डटे हुए हैं तथा लोगों को अपनी कलम व आवाज के माध्यम से न केवल जागरूक कर रहे हैं बल्कि उनकी समस्याओं को शासन- प्रशासन तक भी पहुंचा रहे है।समाजसेवी लोग जो पीड़ित लोगों की मदद कर रहे है। प्रशासन के लोग जो दिन रात जुटे हुए है उनके अच्छे कार्यों को समाज मे दिखाकर उनका भी हौसला बढ़ा रहे हैं ।
    इसके लिए ये साथी सैकड़ों किमी यात्राएं गांवों, बीहडों में करके तथ्यात्मक जानकारी निकाल कर पुलिस प्रशासन को उपलब्ध कराने में लगे हैं। जिससे प्रशासन को और बेहतरी से काम करने मे मदद मिल रही हैं तथा आम लोगों को इसका फायदा मिल रहा है।
यह सब करते हुए हमेशा उन पर भी कोविड से संक्रमित होने का खतरा बना रहता है लेकिन यह अपने फर्ज को तरजीह देकर अपना चौथे स्तंभ का दायित्व निभा रहे हैं।
देश दुनिया मे कई मिडिया कर्मियों के संक्रमित होने की खबरे आती रहती हैं फिर भी इनके हौसले मे कोई कमी नहीं दिखाई देती हैं।
ये सब कोरोना योद्धा की तरह डटे हुए हैं।
मैं पुलिस विभाग एवम् देशवासियों की तरफ से आपका अभिन्दन करता हूँ, सलाम करता हूँ।"

 

रतन लाल डांगी, पुलिस महानिरीक्षक, सरगुजा रेंज, छत्तीसगढ़.

 

क्या आप जानते हैं ओरछा में है अयोध्या के श्रीराम की मूल प्रतिमा......पूरी खबर पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करे

Date : 10-Nov-2019

मल्टीमीडिया डेस्क। पौराणिक नगरी अयोध्या प्रभू श्रीराम के पहले और उसके बाद में इतिहास के अनेक दौर की गवाह रही है। वैभव के अदभुत पल और रामराज्य की कल्पना इसी नगरी में साकार हुई तो विघ्वंस और विनाश का कहर भी इस नगरी पर बरपा है, लेकिन इसके बावजूद मर्यादा पुरुषोत्तम की इस नगरी का वैभव, पुरातन और पौराणिक स्वरूप वैदिक काल से बरकरार रहा है।

ओरछा में विराजे है अयोध्या के श्रीराम

अयोध्या की पहचान सूर्यवंश और उसके तेजस्वी महाराज प्रभू श्रीराम से है। पौराणिक मान्यता है कि अयोध्या में श्रीराम का अवतरण हुआ यहीं पर सरयू किनारे से उन्होनें स्वर्ग के लिए प्रस्थान किया था। उसके बाद से प्रतिमा स्वरूप में हमेशा श्रीराम अयोध्या में विराजमान रहे। कहा जाता है कि उज्जैन के राजा महाराजा विक्रमादित्य ने अयोध्या में राम जन्मभूमी पर मंदिर का निर्माण कर श्रीराम की प्रतिमा की स्थापना की थी। ऐसा दावा किया जाता है कि सन 1528 में जब बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राम मंदिर का विघ्वंस किया था उस वक्त ओरछा की महारानी महाराज विक्रमादित्य द्वारा स्थापित श्रीराम की मूर्ति को लेकर चली गई थी। ओरछा के मंदिर में आज भी वही मूर्ति विद्यमान है। वर्तमान में राम जन्मभूमि पर श्रीराम वह प्रतिमा विराजमान है जो 22 दिसंबर 1949 को रखी गई थी।

ऐसे पहुंचे श्रीराम अयोध्या से ओरछा

अयोध्या में बसने वाले श्रीराम आखिर ओरछा कैसे पहुंचे और फिर वहीं के होकर कैसे रह गए इसकी कहानी भी बड़ी रोचक और एक महारानी की रामभक्ति की अदुभुत दास्तान है। ओरछा में उस वक्त राजा मधुकरशाह का राजपाट था। उनकी रानी का नाम गणेशकुंवर था। राजा मधुकरशाह कृष्णभक्त थे, जबकि रानी गणेशकुंवर रामभक्त थी एक बार राजा ने अपनी रामभक्त रानी से वृंदावन चलने को कहा। रानी श्रीराम को अपना इष्टदेव मानती थी इसलिए उन्होंने वृंदावन जाने से मना कर दिया। राजा को रानी की यह बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने रानी गणेशकुंवर को उलाहना दिया की यदि तुम इतनी रामभक्त हो तो अपने राम को अयोध्या ले आओ।

रानी गणेशकुंवरी को राजा मधुकरशाह की बात चुभ गई। रानी अयोध्या चली गई और सरयू किनारे कुटिया बनाकर साधना करने लगी। अयोध्या में संत तुलसीदास से आशीर्वाद पाकर उनकी तपस्या और ज्यादा कठोर हो गई। कठोर तप के बाद भी जब रानी को प्रभू श्रीराम के दर्शन नहीं हुए तो वह जलसमाधि के लिए सरयू के के तट पर पहुंची। उस वक्त अयोध्या के संतों ने आक्रमणकारियों से बचाने के लिए जन्मभूमि में विराजमान श्रीराम के विग्रह को जलसमाधि देकर बालू में दबा दिया था। कहा जाता है कि उस वक्त रानी गणेशकुंवर को सरयू के जल में श्रीराम के उसी विग्रह के दर्शन हुए।

रानी ने किया श्रीराम से ओरछा चलने का आग्रह

रानी गणेशकुंवरी ने भगवान श्रीराम से ओरछा चलने का निवेदन किया। उस समय श्रीराम ने रानी से तीन शर्ते रखी थी पहली मैं जिस जगह पर बैठ जाऊंगा वहां से उठूंगा नहीं। दूसरी शर्त यह थी कि वह ओरछा इसी शर्त पर जाएंगे कि उस इलाके मे उन्ही का राजपाठ रहेगा तीसरी शर्त यह थी कि वह अयोध्या से बाल्यावस्था में साधु- संतों के साथ पैदल पुष्य नक्षत्र ले जाए जाएंगे। अयोध्या से श्रीराम को रानी साधुसंतों के साथ 8 माह और 28 दिनों की पदयात्रा के बाद संवत 1631 चैत्र शुक्ल नवमी के दिन ओरछा लेकर आई थी। इसके बाद से ओरछा में मधुकरशाह ने श्रीराम के लिए राजपाट त्याग दिया और ओरछा में श्रीराम को सत्ता सौंपकर उनके नाम से राजकाज करने लगे।

यह भी कहा जाता है कि श्रीराम वनवास गमन के लिए चले गए थे। जब लौटकर आए तो उनके पिता का देहांत हो चुका था इसलिए राजा मधुकरशाह और रानी गणेशकुंवर ने श्रीराम को पुत्रवत माना और विवाह पंचमी के दिन उनका विधिवत विवाह कर उनका राजतिलक किया। राजशाही समाप्त होने के बाद आज भी ओरछा में प्रभू श्रीराम का शासन चलता है। मध्य प्रदेश पुलिस के जवान प्रभू श्रीराम के दरबार में तैनात रहते हैं और सूर्योदय और सूर्यास्त के समय उनको सलामी देते हैं। श्रीराम के मंदिर को रामराजा का महल कहा जाता है। यह भी कहा जाता है कि जब अयोध्या से मूर्ति को लाया गया तो महल की रसोई में मूर्ति को मंदिर मे स्थापित करने से पहले रखा गया। जब मूर्ति को मंदिर में स्थापित करने के लिए उठाने की कोशिश की गई तो मूर्ति नहीं हिली, तब महल की रसोई में मूर्ती के स्थापित कर उसको राम राजा का महल नाम दे दिया गया।

#Ayodhya_Ram_Mandir_2019_क्या_आप_जानते_हैं_ओरछा_में_है_अयोध्या_के_श्रीराम_की_मूल_प्रतिमा_जानिए_कैसे_पहुंची_यहां

अयोध्या पर फैसले से पहले जम्मू-कश्मीर में सतर्कता, गली-गली में चौकसी

Date : 08-Nov-2019
  • अयोध्या का फैसला आने से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने की कोशिश के तहत पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने शुक्रवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष जम्मू में उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें किसी भी तरह की स्थिति से निपटने और राज्य में सुरक्षा कायम रखने की रणनीति बनाई गई।

  • जम्मू में उच्चस्तरीय बैठक करते पुलिस अधिकारी (फोटो सोर्स -ANI)

अयोध्या। अयोध्या का फैसला आने से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने की कोशिश के तहत पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने शुक्रवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष जम्मू में उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें किसी भी तरह की स्थिति से निपटने और राज्य में सुरक्षा कायम रखने की रणनीति बनाई गई। राज्य में सतर्कता बढ़ा दी गई है। हर गली-मोहल्ले में चौकसी बरती जा रही है।

अयोध्या में राममंदिर और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर फैसला आने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाली बेंच जल्द ही इस मसले पर फैसला सुना सकती है। ऐसे में पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है। उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों को गृह मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में शान्ति हर हाल में बनाए रखने के लिए अधिकारी पूरी तरह सजग और तत्पर रहें। साथ ही सीएम योगी ने निर्देश दिए कि अव्यवस्था और अराजकता पैदा करने वालों को बख्शा न जाए और समय रहते कार्रवाई की जाए।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और चीफ सेक्रेट्री को तलब किया है। बताया जा रहा है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से मिलने चीफ सेक्रेटी राजेंद्र तिवारी और डीजीपी ओपी सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अयोध्या पर संभावित फैसले से पहले की तैयारियों को लेकर चीफ जस्टिस और अफसरों की बैठक शुरू हो गई है। अयोध्या में केंद्र की ओर से 4000 पैरा मिलिट्री फोर्स के अतिरिक्त जवान भेजे गए हैं।

पीएम मोदी की अपील: अयोध्या मामले में फैसले से पहले पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) कैबिनेट बैठक की और मंत्रियों को सलाह दी कि उकसाने वाली और बेवजह बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अयोध्या विवाद पर फैसले को लेकर देश में शांति और सौहार्द्र बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।

फैसले से पहले: 1990 के बाद पहली बार विहिप ने पत्थर तराशने का काम रोका, 8 अस्थाई जेल बनाईं गईं

Date : 08-Nov-2019
  • फैसले के मद्देनजर केंद्र ने सभी राज्यों को अलर्ट भेजा, अयोध्या में 4 हजार अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे गए

  • अयोध्या में 10 दिसंबर तक धारा-144 लागू, जिले को चार जोन- रेड, येलो, ग्रीन और ब्लू में बांटा गया

  • सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार या भड़काऊ कंटेंट पर नजर रखने के लिए 16 हजार वॉलंटियर तैनात

नई दिल्ली अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 17 नवंबर से पहले आने की संभावना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फैसले से पहले देश के सभी राज्यों को अलर्ट पर रहने को कहा है। केंद्र ने अर्धसैनिक बलों के 4,000 जवान भी उत्तर प्रदेश के लिए रवाना कर दिए हैं। अयोध्या में प्रशासन ने 10 दिसंबर तक धारा-144 लागू कर दी है। पड़ोसी जिले अंबेडकर नगर में 8 अस्थायी जेल बनाई गई हैं। ये सभी जेल, कॉलेजों में बनाई गई हैं। इधर, विहिप ने राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम रोक दिया। 1990 के बाद से यह पहली बार है कि विहिप ने काम रोका है।
अयोध्या पर फैसले को देखते हुए रेल पुलिस (आरपीएफ) ने भी एडवाइजरी जारी की है। सभी जोन कार्यालयों को भेजे गए 7 पन्नों के दस्तावेज में प्लेटफॉर्म, स्टेशन और यार्ड पर खास निगरानी रखने को कहा गया है। साथ ही हिंसा की दृष्टि से संवेदनशील और ऐसे स्थानों की पहचान करने को कहा है, जहां असामाजिक तत्व विस्फोटक छुपा सकते हैं। भीड़भाड़ वाले 78 स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ाने को कहा गया है, जिनमें मुंबई, दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के स्टेशन शामिल हैं। साथ ही, रेलवे स्टेशन और आस-पास मौजूद धार्मिक स्थानों की खास निगरानी करने को कहा गया है। आरपीएफ ने अपने सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और अयोध्या पर फैसला आने से पहले रेलगाड़ियों में भी अतिरिक्त बल तैनात करने की बात कही है।

  • प्रशासन ने फोर्स की 100 कंपनियां मांगीं

अयोध्या जिले को चार जोन- रेड, येलो, ग्रीन और ब्लू में बांटा गया है। इनमें 48 सेक्टर बनाए गए हैं। विवादित परिसर, रेड जोन में स्थित है। पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा योजना इस तरह बनाई जा रही है कि एक आदेश पर पूरी अयोध्या को सील किया जा सके। प्रशासन ने फैसले का समय नजदीक आने पर, अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त 100 कंपनियां मांगी हैं। इससे पहले दीपोत्सव पर यहां सुरक्षाबलों की 47 कंपनियां पहुंची थीं, जो अभी भी तैनात है।
1.25 लाख घनफीट पत्थर तराशे गए
अयोध्या में विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम रोक दिया गया है। 1990 के बाद यह पहला मौका है, जब पत्थर तराशना बंद किया गया है। अब तक 1.25 लाख घनफीट पत्थर तराशा जा चुका है। अभी 1.75 लाख घनफीट पत्थर को तराशना बाकी है। पत्थर तराशने में लगे कारीगर घर लौट गए हैं। विहिप प्रवक्ता ने कहा- फैसले के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही विहिप ने अपने सभी कार्यक्रम भी निरस्त कर दिए।

  • 16000 वॉलियंटर्स तैनात

अयोध्या पुलिस ने सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या किसी भी सम्प्रदाय के खिलाफ भड़काऊ कंटेंट के प्रसार पर नजर रखने के लिए जिले के 1600 स्थानों पर 16 हजार वॉलंटियर तैनात किए हैं। गड़बड़ी रोकने के लिए 3000 लोगों को चिह्नित करके उनकी निगरानी की जा रही है।
हमारी तैयारियां पूरी: डीएम 
अयोध्या के डीएम अनुज कुमार ने कहा कि प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। हालांकि फैसले के मद्देनजर विवादित जगह के आसपास रहने वाले लोग घरों में राशन जमा कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि सामान्य जीवन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फैसले के बाद स्कूलों के खुलने के संबंध में भी बातचीत की जा चुकी है।

  • कड़ी सुरक्षा में पंचकोसी परिक्रमा

गुरुवार को अयोध्या में हर साल कार्तिक माह में होने वाली पंचकोसी (16 किमी) परिक्रमा शुरू हुई। इसमें तकरीबन 15 लाख श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। परिक्रमा में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए हैं। अयोध्या में मौजूद फोर्स की 47 कंपनियों को यात्रियों की सुरक्षा में तैनात किया गया है।

प्याज की बढ़ती कीमत ने लोगो को रुलाया, एक हफ्ते में 45% बढ़े दाम, 80 रुपए किलो तक बिक्री

Date : 06-Nov-2019

जनमुददा टीम डिजिटल। राजधानी दिल्ली (Delhi) में प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं। सरकार के आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रण रखने के कदमों के बावजूद पिछले एक हफ्ते में प्याज (Onion) का खुदरा मूल्य 45 प्रतिशत बढ़कर 80 रुपये  प्रतिकिलो पहुंच गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एक अक्टूबर को प्याज का भाव 55 रुपये किलो था। महाराष्ट्र जैसे प्याज उत्पादक राज्यों में भारी बारिश के बाद इस सब्जी की आपूर्ति पर असर पड़ा है। आकंड़ों के मुताबिक, प्याज की कीमतों में पिछले साल की तुलना में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। नवंबर 2018 में खुदरा बाजार में प्याज का भाव 30-35 रुपये किलो था। दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर के अन्य क्षेत्रों में भी प्याज की कीमतें बहुत अधिक हैं। हालांकि दिल्ली में प्याज राजनीतिक रूप से संवेदनशील वस्तु रही है। उपभोक्ता मामले के मंत्रालय के एक वरिष्ठ को बताया आने वाले दिनों में प्याज के दाम में नरमी आ सकती है क्योंकि महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक में नई फसल की आवक शुरू हो गई है। हालांकि बेमौसम बारिश की वजह से इन्हें उपभोक्ता क्षेत्रों तक लाने में दिक्कत हो रही है। सहकारी संस्था नेफेड के बफर स्टॉक से आपूर्ति करने से दिल्ली में प्याज की उपलब्धता सुधर रही है। अधिकारी ने कहा कि मदर डेयरी दिल्ली- एनसीआर (Delhi- NCR) में 400 से अधिक सफल बिक्री केन्द्रों के माध्यम से बफर स्टॉक से 24.90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज बेच रही है। हालांकि, कुछ केंद्रों पर प्याज का स्टॉक खत्म हो गया है और ग्राहकों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।  इस बीच सरकार ने अफगानिस्तान, मिस्त्र , तुर्की और ईरान से प्याज के निजी आयात की सुविधा देने का फैसला किया है।  अधिकारी ने कहा कि निजी व्यापारियों ने सरकार को बताया कि आयातित प्याज के 80 कंटेनर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं और 100 कंटेनरों को समुद्री मार्ग से भारत भेजा जा सकता है।


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गोवा: 92 फीसदी रेप पीड़िता के जानने वालों ने किए!

Date : 29-Apr-2019


गोवा पुलिस ने महिला के साथ हो रहे अपराधों के आंकड़ों का विश्लेषण जारी किया है। गोवा पुलिस के इन आंकड़ों की मानें तो महिलाओं के साथ होने वाले 92 फीसदी रेप उनके जानने वाले ही करते हैं। डीजीपी मुकेश चंद्र ने बताया कि हालांकि यह साफ नहीं है कि रेप पीड़िताओं के जानने वाले गोवा के रहने वाले थे या गोवा के बाहर के। एसपी क्राइम ब्रांच कार्तिक कश्यप ने बताया कि गोवा में जो भी रेप केस रजिस्टर्ड किए गए उनमें से 92 फीसदी रेप के आरोप लड़कियों के दोस्तों, रिश्तेदारों और उनकी जान-पहचान के लोगों पर लगे। सिर्फ 8 फीसदी मामलों में ऐसा पाया गया, जिसमें आरोपी पीड़िताओं के जानने वाले नहीं थे। कार्तिक ने बताया कि गोवा पुलिस ने 2015 से 31 मई 2018 तक 256 रेप केस दर्ज किए। 162 मामलों में पाया गया कि आरोपी पीड़िता के दोस्त थे, 26 मामलों में उनके रिश्तेदार, 17 में उनके पड़ोसी, 6 मामलों में उनके पिता, 1 केस में भाई और 23 में अन्य जानने वाले लोग थे। बीते साढ़े तीन वर्षों में देखें तो सिर्फ 20 मामले ही ऐसे थे, जिसमें पीड़िता आरोपी को किसी भी तरीके से नहीं जानती थी। यह आंकड़े नैशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के बाद सामने आए हैं। देश में 95 फीसदी रेप के मामलों में पाया गया कि पीड़िता पहले से आरोपी को जानती थी। एसपी ने बताया कि इस साल 23 अप्रैल से 31 मई तक पुलिस ने सिर्फ सात केस दर्ज किए हैं। पिछले साल की तुलना में यह संख्या 13 फीसदी कम है। गोवा में रेप की घटनाओं में 93.1 फीसदी कमी आई है। वहीं महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में 89 फीसदी कमी दर्ज हुई है। इन आंकडों के साथ गोवा देश का पहला ऐसा राज्य है जहां महिलाओं के साथ होने वाले

अपराधों में सबसे ज्यादा गिरावट आई है।

उन्होंने बताया कि गोवा पुलिस महिला अपराधों में कमी लाने के लिए विभिन्न तरीके अपना रही है। स्कूलों और कॉलेजों में लड़कियों के आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जा रही है। अब तक हजारों लड़कियों को आत्मरक्षा सिखाई जा चुकी है। लड़कियों और महिलाओं के लिए 1091 हेल्पलाइन भी बनी है जिसमें सूचना आते ही मौके पर तत्काल पीसीआर वैन भेजी जाती है। समुद्र के किनारों पर पर्यटन पुलिस सादी वर्दी में तैनात रहती है। पुलिसवालों को संवेदनशील बनाने के लिए समय-समय पर कार्यशाला का आयोजन होता है।

बुझ नहीं रही ‘प्यास’, टूट रही ‘आस’!

Date : 29-Apr-2019

टंकी निर्माण व पाइप लाइन विस्तार का काम पिछड़ा

राजनांदगांव। अमृत मिशन योजना के तहत पाइप लाइन विस्तार के बाद पानी की समस्या से निजात मिलने की राह तकने वाले लोगों की आस इस साल भी टूटती नजर आ रही है। योजना का काम पूरी तरह पिछड़ सा गया है। यहां टंकियों का निर्माण नहीं हो पाया है, वहीं पाइप लाइन विस्तार में भी निर्धारित समयावधि से काफी पीछे चल रहा है। ज्यादा समस्या वाले वार्ड के टंकी निर्माण में भी देरी हो रही है। अमृत मिशन योजना को दिसंबर 2017 में स्वीकृति मिली थी। इसके तहत 220 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट में इंदिरा नगर, कंचनबाग, नवागांव, तुलसीपुर, चिखली और स्टेशनपारा को मिलाकर कुल 6 जगहों पर ओवर हेड टंकी निर्माण किया जा रहा है। जहां से वार्डो में पानी की सप्लाई की जाएगी। खास बात यह है कि अमृत मिशन योजना के तहत निर्माणाधीन छह टंकियों में से नवागांव की टंकी को तर्जीह दी थी। यहां के टंकी निर्माण के काम को सबसे पहले पूरा करने का टारगेट रखा गया था, लेकिन ओवर हेड टंकी का निर्माण कार्य पिछड़ गया है। इसकी मुख्य वजह ड्राइंग डिजाइन में बदलाव को कारण बताया जा रहा है। वहीं शेष टंकियों का निर्माण कार्य की स्थिति तेज गति नहीं पकड़ पाया है। साथ ही पाइप लाइन विस्तार का भी काफी पिछड़ा हुआ है। यहीं वजह है कि अब प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए एक्सटेंशन भी ले लिया है। अब यह काम मियाद से तीन माह आगे कर दिया गया है। इसके बाद भी योजना के काम में तेजी दिखायी नहीं पड़ रही है। ऐसी स्थिति में निर्धारित समयावधि में काम पूरा होने की संभावना मुश्किल नजर आ रही है। गौरतलब है कि अमृत मिशन के तहत नवागांव क्षेत्र में टंकी निर्माण और वाटर सप्लायी का कार्य 2019 की गर्मी तक शुरू करने का दावा किया गया था। अफसरों का कहना था कि अप्रैल-मई 2019 तक नवागांव क्षेत्र में पानी की समस्या दूर हो जाएगी। इसके बाद संबंधित क्षेत्र के लोगों में इस गर्मी में पेयजल समस्या से मुक्ति की उम्मीद जगी थी, लेकिन वर्तमान में नवागांव टंकी से जलापूर्ति शुरू नहीं हो पायी है। इस कार्य मेंं अभी और समय लग सकता है। बताया गया कि नवागांव टंकी को मोहारा स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जोडऩे के लिए रेल्वे पटरी के नीचे से पाइप लाइन ले जाना था। इसमें रेल्वे की ओर से स्वीकृति में हुई देरी के चलते काम पिछड़ गया है। इस वजह से इस साल की गर्मी में भी प्रभावित क्षेत्र के लोगों को मिशन अमृत के तहत पानी मिलना मुश्किल लग रहा है।

 हाथ में नक्शा नहीं, विस्तार में देरी

अमृत मिशन योजना के तहत पाइप लाइन विस्तार में हो रही देरी को लेकर एक बड़ा तथ्य सामने आया है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट के तहत काम करने वाले ठेकेदार के हाथ में नगर निगम क्षेत्र में बिछी पुरानी पाइप लाइन का पूरा नक्शा उपलब्ध नहीं हुआ है। सूत्रों की माने तो शहर में बिछी पुरानी पाइप लाइन का पूरा नक्शा निकालने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। यहीं वजह है कि प्रोजेक्ट में काम करने वाली कंपनी को पाइप लाइन विस्तार में देरी हो रही है। इस वजह से पाइप दबाने के लिए रिंग रोड को भी खोदा गया है। यही वजह है कि शहर की सडक़ों की सूरत भी बिगड़ रही है।

टंकी निर्माण के साथ पाईप बिछाने का काम भी अधूरा

अमृत मिशन का प्रोजेक्ट दो साल में पूरा कर लेने का दावा किया गया था, लेकिन काम में तेजी नहीं आई है। फिलहाल ओवरडेह टंकियों का निर्माण जारी है। 220 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में ओवरहेड टंकी का निर्माण 70 फीसदी तक पूरा नहीं हो सका है। इधर आउटर में पाइप लाइन बिछाने का काम जल्द से जल्द शुरू करने का दावा किया गया था, लेकिन हालात यह है कि शहर के किसी भी हिस्से में अमृत मिशन के तहत पाइप विस्तार का काम नहीं हो सका है। नालियों के बीच से गुजरने वाली पाइल लाइनों की भी जगह बदला जाना था, लेकिन अब तक इस दिशा में भी कोई पहल नहीं हो सकी है। कुल मिलाकर कागजी काम ने ही जोर पकड़ा है।

बिजली कटौती से कितनी राहत?

शहर के आऊटर में गर्मी से पहले पानी की सप्लाई करने के लिए नगर निगम के पास कोई तगड़ी प्लानिंग नहीं है। यहीं वजह है कि ऐन गर्मी में लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। आऊटर के मोतीपुर पटरीपार के संकटग्रस्त वार्डो की हालत बेहद दयनीय है। यहां ममता नगर, तुलसीपुर, सिविल लाइन, चिखली, स्टेशनपारा, गौरी नगर, बसंतपुर और आऊटर के ग्रामीण वार्ड में पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। यहां नलों में फोर्स की कमी के अलावा नल देरी से और कम समय के लिए खुलने की शिकायत खुलकर सामने आ रही है। नगर निगम ने आऊटर में फोर्स कम होने की वजह टूल्लू पंप को बताया है। यानी शहर में नलों के पानी को टूल्लू पंप से खिचने की वजह से आऊटर के वार्डों में ठीक से पानी नहीं पहुंचने का तर्क दिया है। यहीं वजह है कि नल खुलने के सयम वार्र्डाे की बिजली कट कर जाती है। इससे पंप का इस्तेमाल न हो और सभी लोगो तक पानी पहुंच सके। इसके बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम एक 'पाती'

Date : 13-Apr-2019

बीते दिन विभिन्न संस्थाओ के पदाधिकारियों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम पर एक पाती लिखी जिसमे ग्राम रामडीहा, पोस्ट  गवन्दाल, जिला पूर्वी चम्पारण, बिहार निवासी दो लोगों की पुलिस थाने में हुई मौत को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके हत्या के आरोपियों को सजा दिलाने व मृतक के परिजनों को मुआवजा राशि देने की मांग कही देखिए नीतीश कुमार के नाम पाती : - 

रिपोर्ट: बीते साल 'अत्‍यधिक भूख' के शिकार हुए 1 अरब से ज्यादा लोग

Date : 13-Apr-2019

संयुक्‍त राष्‍ट्र, पीटीआइ। हम भले ही चांद पर पहुंच गए हों, लेकिन आज भी करोड़ों लोगों को भूखा रहना पड़ रहा है। संयुक्‍त राष्‍ट्र की रिपोर्ट में 'अत्‍यधिक भूख' के शिकार लोगों को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट बताती है कि बीते साल दुनिया के 53 देशों में 11.3 करोड़ से ज्‍यादा लोग युद्ध, आर्थिक अशांति और जलवायु आपदाओं के चलते आहार की भारी कमी का शिकार हुए हैं। इन 53 देशों में से आहार संकट से सबसे ज्‍यादा प्रभाव अफ्रीका पर हुआ है।

विश्‍व भर में भूख से मरनेवाले लोगों से जुड़े ये आंकड़े संयुक्‍त राष्‍ट्र ने मंगलवार को यह जानकारी साझा की। ऐसे में सवाल उठता है कि ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में हमारी प्राथमिकता क्‍या होनी चाहिए। खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने खाद्य संकट पर 2019 की अपनी रिपोर्ट में बताया कि सीरिया, इथोपिया, सुडान और उत्‍तरी नाइजीरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, अफगानिस्तान और यमन उन आठ देशों में शामिल हैं, जहां भुखमरी के शिकार लोगों का दो तिहाई हिस्सा है। इसके लिए आर्थिक उथल-पुथल और जलवायु आपदाओं जैसे सूखा एवं बाढ़ के साथ ही संघर्ष और असुरक्षा अहम कारक रहे।

बता दें कि तीन साल पहले शुरू हुए इस वार्षिक अध्ययन में इस भयंकर संकट से जूझ रहे देशों का जायजा लिया जाता है। हालिया रिपोर्ट संयुक्‍त राष्‍ट्र और यूरोपियन यूनियन के द्वारा तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में बड़ी संख्या में शरणार्थियों को शरण देने वाले देशों, युद्ध प्रभावित सीरिया के पड़ोसी देशों पर पड़ने वाले दबावों को रेखांकित किया गया है। ऐसे देशों में बांग्लादेश भी है, जहां म्यामांर के लाखों रोहिंग्या शरणार्थी हैं।

एफएओ ने कहा कि यदि वेनेजुएला में राजनीतिक और आर्थिक संकट बना रहता है, तो विस्थापित लोगों की संख्या बढ़ सकती है। वेनेजुएला इस साल खाद्य आपात की घोषणा कर सकता है। एफएओ के आपात निदेशक डोमनिक बुर्जुआ ने बताया कि इस संकट की सबसे अधिक मार अफ्रीकी देशों पर पड़ी है, जहां 7.2 करोड़ लोग खाद्यान्न की कमी से जूझ रहे हैं। बुर्जुआ ने कहा कि भुखमरी के कगार पर खड़े देशों में 80 फीसद लोग कृषि पर निर्भर हैं।

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