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	<title>संपादकीय Archives | Janmudda</title>
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	<description>Latest Hindi News</description>
	<lastBuildDate>Tue, 05 Jan 2021 13:03:04 +0000</lastBuildDate>
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	<title>संपादकीय Archives | Janmudda</title>
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	<item>
		<title>मतदाता सूची में सुधार की मांग युवा कांग्रेस ने सौपा ज्ञापन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Jan 2021 13:03:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बस्ती – भारतीय युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपेश पाण्डेय के नेतृत्व में पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन देकर ग्राम पंचायत चुनाव के लिये बनायी जा&#8230; </p>
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<h6 class="wp-block-heading">बस्ती – भारतीय युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपेश पाण्डेय के नेतृत्व में पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को </h6>



<h6 class="wp-block-heading">जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन देकर ग्राम पंचायत चुनाव के लिये बनायी जा रही मतदाता सूचियों की खामियों को दूर कराये जाने की मांग किया।</h6>



<h6 class="wp-block-heading"><br>ज्ञापन में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपेश पाण्डेय ने कहा है कि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के चुनावों को लेकर जहां प्रत्याशी सक्रिय होने लगे है</h6>



<h6 class="wp-block-heading"> वहीं मतदाता सूचियों में खामियों खुलकर सामने आ रही है। बीएलओ पर प्रत्याशी अकारण दबाव बना रहे हैं और कुछ स्थानों पर तो बीएलओ खुद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।</h6>



<h6 class="wp-block-heading"> इस कारण से यदि मतदाता सूचियों में सुधार न कराया गया तो चुनाव के समय हिंसा, तनाव की स्थितियां सामने आ सकती है।</h6>



<h6 class="wp-block-heading"><br>ज्ञापन सौपने वालों में मुख्य रूप से दुर्गेश त्रिपाठी, रामकृष्ण दूबे</h6>



<h6 class="wp-block-heading">, पवन अग्रहरि, सत्येन्द्र मिश्र, अंकित शुक्ल, आनन्द यादव, सर्वेश शुक्ल, विकास वर्मा, अनुराग पाण्डेय आदि शामिल रहे।</h6>



<p></p>
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		<title>सबके लिए प्रार्थना करते हुए हम 2021 में प्रवेश कर चुके</title>
		<link>https://janmudda.com/praying-for-all-we-have-entered-2021/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Jan 2021 10:08:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>र्वे भवन्तु सुखिन:किरण चोपड़ाहैं। 2020 कभी न भूलने वाला मनहूस साल होगा, जिसमें बहुत लोगों ने अपनों को खोया। यह नुक्सान विश्व स्तर पर था। बहुत से लोगों के व्यापार&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>र्वे भवन्तु सुखिन:किरण चोपड़ाहैं। 2020 कभी न भूलने वाला मनहूस साल होगा, जिसमें बहुत लोगों ने अपनों को खोया। यह नुक्सान विश्व स्तर पर था।</p>



<p> बहुत से लोगों के व्यापार बंद हुए, नौकरियां गईं, सेहत गई, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा। कुल मिलाकर सब कुछ ठहर गया। डर और सहम का वातावरण?था। सबके अन्दर यही डर था कि न जाने किस समय क्या हो जाए।</p>



<p><br>हम सभी भारतवासी सर्वे भवन्तु सुखिन: पर विश्वास रखकर चलते हैं। यही नहीं सरकार यानी हमारे पीएम नरेन्द्र मोदी जी समय-समय पर जनता के साथ जुड़े रहे, उन्हें डर से मुक्त करने के लिए कहीं दीपक जलवाए</p>



<p>, कहीं थालियां बजवाईं, कहीं राम मंदिर का शिलान्यास करते हुए सबकी धर्म में आस्था पैदा की। यही नहीं सरकार ने हर बिजनेसमैन को मुश्किलों से निकालने के लिए?</p>



<p>कई जगह सिर पर हाथ रखा। कहीं पर साथ दिया, कभी सभी स्ट्रेच्युरी पेमैंट पर जीएसटी, इन्कम?टैक्स, प्रॉविडेंट फंड, कहीं डेट बढ़ाकर, कहीं रियायतें देकर हर सम्भव मदद की, परन्तु एक तो संकट?इतना बड़ा था </p>



<p>और विश्व स्तर पर लोगों को कोरोना के कारण नुक्सान भी बहुत बड़ा था, जानमाल की हानि थी। कोई भी व्यक्ति पूरी तरह से तो?खुश हो ही नहीं सकता।</p>



<p>  अगर एक मां के कई?बच्चे हों तो वह भी सारे बच्चों को खुश नहीं रख सकती। यह तो एक पीएम हैं, जिनसे अनेक भाषाओं, धर्म, जाति और राज्यों के लोग जुड़े हैं।</p>



<p> कहीं न कहीं लोगों की सरकार, ईश्वर, पीएम, सीएम से नाराजगी रहती है। 2021 की शुरूआत कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण के ड्राई रन से हुई।</p>



<p> नए साल में देश में टीकाकरण भी शुरू हो जाएगा।</p>



<p><br>कोरोना की मार से विश्वभर की अर्थव्यवस्था कराह रही है लेकिन भारत के पीएम की सूझबूझ से इस समस्या से भी निपटा जा रहा है क्योंकि वह जमीन से जुड़े हैं और लोगों की समस्याओं को समझते हैं।</p>



<p> यही नहीं दिल्ली के सीएम भी जमीन से जुड़े हैं और इन सबके बीच भारतीय रिजर्व बैंक इस दौरान बहुत ही मददगार रहा, आम लोगों के साथ व्यापार, उद्योगों को कई तरह से राहत देकर इन आर्थिक चुनौतियों से निपटा जा रहा है।</p>



<p> इसका थोड़ा सा सुखद अनुभव इसलिए महसूस हो रहा है क्योंकि  हमारी अर्थव्यवस्था पहले की तरह पटरी पर लौटने  का भरसक प्रयत्न कर रही है।</p>



<p> लोगों की जिंदगी भी नार्मल होती जा रही है। उम्मीद है 2021 लोगों के लिए राहत और मजबूती लेकर आया है।<br></p>



<p>परन्तु अभी भी हमें बहुत सतर्कता की जरूरत है। कोरोना का नया स्ट्रेन भी आ गया है। हम सभी को अपने लाइफ स्टाइल में बदलाव स्थाई रूप से लाना होगा।</p>



<p> मास्क, दो गज की दूरी बहुत  है जरूरी। असल में कोरोना ने कई दिखावोंं जो शादियों, फंक्शन पर होते थे, रोक लगा दी है।</p>



<p> कई चीजें जो अनावश्यक थी उन पर भी अपने आप ही रोक लग गई। अभी छात्र और उनके माता-पिता कई समस्याओं से जूझ रहे हैं।</p>



<p> उम्मीद है उन्हें भी इस साल के मध्य तक राहत मिलेगी।<br>नए साल पर लोग नए ढंग से और नए संकल्प के साथ काम करते हैं, हम भी इस मामले में आप से अलग नहीं हैं।</p>



<p> पिछले साल की तड़प और मानवीय क्षति को देखते हुए साल की शुरूआत हमारे यहां पारम्परिक रूप से हवन के साथ हुई है। </p>



<p>मैं पहले ही स्पष्ट कर चुकी हूं कि प्रार्थना सबके लिए की गई अर्थात सर्वे भवन्तु सुखिन: यानी कि सब लोग सुख में रहें लेकिन इसके साथ ही नए वर्ष पर हमारे सामने कई चुनौतियां हैं।</p>



<p> हालांकि उम्मीदों के रास्ते खुले ह तो हमें इन दोनों पर ही साथ-साथ आगे बढऩा है। कोरोना खत्म होगा, स्कूल-कालेज खुलेंगे, बाजार खुल चुके हैं</p>



<p>, किसान आंदोलन खत्म होगा और ये लोग अपने घरों को लौटेंगे तथा खेत-खलिहान में पहले की तरह जुट जाएंगे। इसके अलावा जो फैक्ट्रियां, कारखाने और उद्योग-धंधे बंद हो गए थे, वे फिर से खुल जाएंगे।</p>



<p> जो मजदूर दिल्ली से लौट कर बिहार या पूर्वी-पश्चिमी उत्तर प्रदेश लौट गए उनकी वापसी होगी, बेरोजगारी दूर होगी।</p>



<p> ऐसी कई चुनौतियां हैं जिनका सामना करते हुए हम जीवन सामान्य रूप से जीने की पटरी पर आ जाएंगे। खुशी इस बात की है कि वर्ष 2021 के आरम्भ में ही हम ऐसी उम्मीद कर रहे हैं और जब उम्मीद की किरण रोशन होती है तो सब कुछ सही होता है। </p>



<p>कितने ही गीतकारों ने इतनी अच्छी-अच्छी बातें कहीं हैं, जिन्हें जीवन में उतार कर आगे बढऩा है। कन्हैया ने कहां जन्म लिया, कहां किसने पाला, कितनी मुसीबतों का सामना किया, कितने राक्षसों को मारा और आखिरकार धर्म युद्ध हुआ जिसमें उन्हें विजय मिली।</p>



<p> मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मां जगदम्बा, महालक्ष्मी, महा सरस्वती और महाकाली के रूप में मानव जाति का कल्याण किया गया</p>



<p> तो यह हमारी आस्था की कहानी है जो हमारे जीवन को आज भी अपने साथ चला रही है।<br>हमारे छात्र और कर्मचारी या फिर अन्य लोग आज भी कोरोना से प्रभावित हो रहे हैं परन्तु मेरा मानना है </p>



<p>कि इस कोरोना काल में हमने चुनौतियों से लडऩा सीखा, सबकुछ साकारात्मक रहा, आनलाइन कक्षाएं छात्रों ने सीखीं तो शिक्षकों ने भी खुद को अपडेट किया। नई-नई तकनीक मोबाइल ने सिखला दी और सबका सिस्टम आनलाइन हुआ। फिर भी मुश्किलें </p>



<p>आईं, मेरा मानना है कि मुश्किलों में ही आदमी और निखरता है। पिछले वर्ष ही हमने अश्विनी जी को खोया था लेकिन वो कहा करते थे</p>



<p> कि मुश्किलों से घबराना नहीं। उनकी बात हम स्वीकार करते हैं और पालन कर रहे हैं। इसीलिए मुश्किलों पर हम विजय पा रहे हैं।</p>



<p> कई और क्षेत्र हैं जहां हर किसी के लिए मुश्किलों भरा<br>समय आता है, वह भगवान पर भी आया है परन्तु हम मुश्किलों से लड़ते हैं तभी जीतते हैं, इसे ही जीवन का उतार-चढ़ाव कहा गया है।</p>



<p>  हम लोग अपने काम में डटे रहें, मेहनत करते रहें और सबके भले की भावना के साथ आगे बढ़ते चलें तो सब कुछ सामान्य होगा यह तय है।</p>



<p> इसलिए वर्ष 2021 के बारे में<br>हम यही कहेगें कि यह वर्ष 20 से 21 ही साबित होगा क्योंकि हम उम्मीदों के साथ चल रहे हैं। एक बार फिर से हर किसी को हैप्पी, हैल्दी, वैल्दी न्यू ईयर।</p>
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		<title>पत्रकारिता के जीवन में जब हर वर्ष दिसंबर महीना आता&#8230;.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Dec 2020 10:50:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>धोखे से बचेंपत्रकारिता के जीवन में जब हर वर्ष दिसंबर महीना आता है तो हम वर्षभर की खास-खास घटनाओं को संकलित करके उनका ब्यौरा न्यूज के व्यूज को लेकर प्रकाशित&#8230; </p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>धोखे से बचें<br>पत्रकारिता के जीवन में जब हर वर्ष दिसंबर महीना आता है तो हम वर्षभर की खास-खास घटनाओं को संकलित करके उनका ब्यौरा न्यूज के व्यूज को लेकर प्रकाशित करते रहते हैं।</p>



<p> पहली बार एक चौंकाने वाली बात यह सामने आयी है कि पूरा ही साल कोरोना महामारी के हमले को लेकर बीत गया। हर रोज एक ही खबर तय होने लगी</p>



<p> कि कोरोना से देश और दुनिया में कितने लोग मरे और कितने संक्रमित हुए। अब जबकि कोरोना पूरे देश में लगभग एक करोड़ लोगों की जान ले चुका है </p>



<p>और हमारे यहां भारत में भी छह लाख लोग मारे जा चुके हैं हालांकि हमारा रिकवरी रेट दुनिया के बाकी देशों से बेहतर है क्योंकि हमने सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए </p>



<p>मास्क का प्रयोग किया है लेकिन अब जबकि वर्ष खत्म होने जा रहा है तो इसके साथ ही एक अच्छी न्यूज सामने आ गयी</p>



<p> जो कोरोना की वैक्सीन अर्थात टीके से जुड़ी है। इसका स्वागत उस दिन से किया जा रहा है जिस दिन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वास्थ्य मंत्री के अलावा हमारे एम्स के निदेशक डाक्टर गुलेरिया ने वैक्सीन को भारत में लाये जाने का ऐलान किया</p>



<p> लेकिन हर एक अच्छी चीज के साथ एक बुरी चीज भी साथ ही शुरू हो जाती है।</p>



<p><br>आजकल सोशल मीडिया पर एक खबर सबसे ज्यादा चल रही है जो कोरोना की वैक्सीन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन से जुड़ी है। </p>



<p>आपके मोबाइल पर बैंकों से लोन लेने की कॉल्स अक्सर आती रहती है। आजकल मोबाइल पर एक कॉल आ रही है जिसमें आपको मोबाइल पर कोरोना की वैक्सीन चाहिए या नहीं चाहिए यह सवाल पूछा जा रहा है। जाहिर सी बात है कि आप इंकार नहीं करेंगे।</p>



<p> आप वैक्सीन के लिए हां कहेंगे तो कॉलर कहता है कि हम आपको दवा देने के लिए रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। कृपया अपना आधार कार्ड नंबर दीजिए आपको यही लगेगा</p>



<p> कि यह हैल्थ सर्विस की ओर से सुविधा है और आप उस पर यकीन कर लेते हैं। अब अगला कदम देखिए कॉलर आपको कहता है कि हम आपको ओटीपी भेज रहे हैं</p>



<p> अर्थात वन टाईम पासवर्ड। आप इसे पढि़ए और हमें दे दीजिए। जैसे ही आप उन्हें भेजेंगे आपके बैंक अकाउंट पर इसकी मार पड़ सकती है।</p>



<p> कोरोना वैक्सीन की आड़ को लेकर साइबर लूटेरों ने यह जाल बिछा दिया है। कृपया इससे सावधान रहिए। </p>



<p>सोशल मीडिया पर इसी तरह कोरोना वैक्सीन को लेकर लाखों लोग एक दूसरे को सावधान रहने की चेतावनी दे रहे हैं।<br></p>



<p>डिजिटल दुनिया में कितने ही लोगों के साथ फ्रॉड होने की खबरें अखबारों की सुखियां बन रही हैं। </p>



<p>एटीएम का नंबर, पासवर्ड और बैंक खातों से पैसा निकलवाने संबंधी साइबर क्राईम बढ़ रहे हैं। </p>



<p>पुलिस बहुत कुछ कर रही है लेकिन अब कोरोना महामारी की वैक्सीन की आड़ को लेकर अगर इस तरह के केस सामने आ रहे हैं तो यह एक खतरे की घंटी है </p>



<p>और हम समझते हैं कि सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय को एक्शन लेकर लोगों को अलर्ट कर देना चाहिए कि वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के मामले में उसने एजेंसी को अभी अधिकृत नहीं किया।</p>



<p> सरकार खुद ऐसे फ्रॉड संगठनों का पता लगाये जो सोशल मीडिया पर इस किस्म का दुस्प्रचार करते हुए लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं।</p>



<p><br>कोरोना के मामले में अभी तीन दिन पहले ही हिंद समाचार पत्र प्रकाशन समूह के संपादक रहे अमर शहीद रमेश चंद्र जी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर हम हर साल हैल्थ कैंप लगाते थे </p>



<p>लेकिन इस बार हैल्थ वेबिनार आयोजित किया जिसमें मुख्य आयोजक हर्ट केयर फाउंडेशन के संस्थापक पद्मश्री डा. के.के. अग्रवाल तथा मैंने स्वयं लोगों से कोरोना को लेकर अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने का आह्वान किया साथ ही</p>



<p> अनेक अन्य डॉक्टरों ने भी लोगों से अपील की है कि कैसे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए किस तरह किन-किन फलों-सब्जियों का सेवन करने से इम्यूनिटी बढ़ती है, </p>



<p>यह मशवरा डाक्टरों ने दिया है। अब लोगों को हैल्थ के प्रति जागरूक तो बना सकते हैं लेकिन बीमारी के राष्ट्र स्तरीय</p>



<p> इलाज को लेकर अगर लूटपाट डिजिटल की दुनिया में उतर रही है तो सचमुच कुछ करना ही होगा। लोग पहले ही कोरोना के जाने का इंतजार कर रहे हैं </p>



<p>कि इसकी नई किस्म के ब्रिटेन से आने के बाद और हड़कंप मचा हुआ है लेकिन साइबर लुटेरे नए-नए तरीके ढूंढ ही लेते हैं। फिर भी जैसे तैसे लोग कोरोना को झेल रहे हैं</p>



<p> और सरकार के साथ-साथ हमारे डाक्टरों, हैल्थ कर्मियों, नर्सों, मीडिया के अलावा कई?अन्य संगठनों ने अपनी ड्यूटी शिद्दत से निभाई?है। </p>



<p>अब यह विचित्र लूटपाट अगर चल रही है तो अच्छाई?से जुड़ी एक बुराई के जन्म लेने की ही बात है जिसका खातमा होना ही चाहिए। एक-दूसरे को लोग</p>



<p> इसी सोशल मीडिया पर अलर्ट रहने के लिए जुट गए हैं तो साइबर लुटेरे अपना काम नहीं कर पायेंगे, इस मामले में सरकार से भी एक्शन की अगर उम्मीद की जा रही है तो वह गलत नहीं है।</p>



<p></p>
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		<title>गुपकार गठबंधन को सचेत करने वाले चुनाव परिणाम</title>
		<link>https://janmudda.com/election-results-alerting-the-gupta-alliance/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Dec 2020 11:23:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को गत वर्ष अगस्त माह में निष्प्रभावी करने के मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले का राज्य&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://janmudda.com/election-results-alerting-the-gupta-alliance/">गुपकार गठबंधन को सचेत करने वाले चुनाव परिणाम</a> appeared first on <a href="https://janmudda.com">Janmudda</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><br><br>जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को गत वर्ष अगस्त माह में निष्प्रभावी करने के मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले का राज्य के जिन क्षेत्रीय दलों ने विरोध किया था</p>



<p> उन्हें जम्मू-कश्मीर के जिला विकास परिषद के चुनाव परिणामों ने सकते में डाल दिया है।राज्य के दो मुख्य क्षेत्रीय विपक्षी दलों &nbsp;नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के वर्चस्व वाले गुपकार गठबंधन ने इन चुनावों में एकतरफा जीत की जो उम्मीद पाल रखी थी</p>



<p> उस पर राज्य के मतदाताओं ने पानी फेर दिया है। जिला विकास परिषद की 280सीटों के लिए संपन्न चुनावों में गुपकार गठबंधन ने भले ही &nbsp;सबसे बड़ी जीत हासिल की हो परंतु अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरी भारतीय जनता पार्टी &nbsp;सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई है।</p>



<p>इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को कश्मीर घाटी में भी चार सीटों पर मिली जीत ने उसके हौसले बुलंद कर दिए हैं।</p>



<p>कश्मीर घाटी में भाजपा को मिली यह सफलता भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी उसकी सफलता की संभावनाओं को बलवती बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। </p>



<p>जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल &nbsp;मनोज सिन्हा ने &nbsp;जिला विकास परिषद के चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद कहा है कि ये परिणाम राज्य में परिवर्तन की लहर का संकेत दे रहे हैं।</p>



<p> &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में जिला विकास परिषद की 280सीटों के लिए आठ चरणों में मतदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई थी और राज्य में संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद पहली बार संपन्न हुए</p>



<p> इन &nbsp;महत्त्व पूर्ण चुनावों के परिणामों पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई थीं ।गुपकार गठबंधन ने पहले इन चुनावों में भाग न लेने का फैसला किया था</p>



<p> परंतु बाद में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में राज्य के मतदाताओं की दिलचस्पी के कारण &nbsp;इस गठबंधन में शामिल दलों को मज़बूरी मेंचुनावों में भाग लेने का फैसला करना पड़ा।</p>



<p> भाजपा ने कई केंद्रीय मंत्रियों को पार्टी के &nbsp;चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन चुनावों में यद्यपि उसे और भी अधिक सीटें जीतने की पूरी उम्मीद थी</p>



<p> परंतु वह कश्मीर घाटी की चार सीटों पर जीत ने उसे प्रफुल्लित होने का अवसर प्रदान कर दिया है।</p>



<p> जम्मू-कश्मीर जिला विकास परिषद की 280 सीटों में से गुपकार गठबंधन ने 100 सीटों पर जीत &nbsp;हासिल की है जबकि भाजपा ने 73 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव प्राप्त किया है। </p>



<p>कांग्रेस केवल 22 सीटें जीतने में सफल हो पाई। इन चुनावों में 46निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर दूसरी पार्टियों का गणित बिगाड़ दिया है</p>



<p> यद्यपि भाजपा के लिए यह संतोष का विषय है कि उसने जिन निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन प्रदान किया था उनमें कई सफल रहे हैं। नवनिर्वाचित जिला विकास परिषदों में गुपकार गठबंधन &nbsp;को &nbsp;कांग्रेस का समर्थन मिलना तय माना जा रहा है</p>



<p> इन चुनावों में विजयी उम्मीदवार अब 20 जि़लों की विकास परिषदों के चेयरमैन का चुनाव करेंगे।संख्या बल के हिसाब से 13परिषदों के चेयरमैन गुपकार गठबंधन के हो सकते हैं जबकि पांच जिला परिषदों में भाजपा के चेयरमैन होंगे। गौरतलब है </p>



<p>कि जम्मू &nbsp;और कश्मीर में बराबर-बराबर 140 सीटों के लिए चुनाव कराए गए थे। दो जिला परिषदों में चेयरमैन चुनने के लिए जोड़ तोड़ की स्थिति बन सकती है।</p>



<p>जम्मू-कश्मीर जिला विकास परिषद के चुनाव जिस तरह &nbsp;पूरी निष्पक्षता और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए हैं</p>



<p> यह इस बात का परिचायक है कि राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए अनुकूल वातावरण बनने लगा है।</p>



<p> शायद अब नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी जैसे क्षेत्रीय<br>दलों को इस हकीकत का अहसास हो गया है कि राज्य की जनता अब अमन-चैन के माहौल में विकास के नए युग की शुरुआत की अधीरता से प्रतीक्षा कर रही है</p>



<p> इसीलिए उसने जिला विकास परिषद के चुनाव में उत्साह पूर्वक हिस्सा लिया और सरकार अब विधानसभा चुनाव कराने की संभावनाओं पर विचार कर सकती है।</p>



<p>जिला विकास परिषद के माध्यम से ही राज्य के 20जिलों में विकास कार्य कराए जाने हैं इसलिए सरकार ने इनके चुनावों में दिलचस्पी दिखाई।</p>



<p><br>&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; गुपकार गठबंधन को इन चुनावों में जो सफलता मिली है उससे उत्साहित होकर नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी जैसे दल राज्य में संविधान के अनुच्छेद 370 को फिर से बहाल किए जाने की मांग &nbsp;कर सकते हैं।</p>



<p> पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया उम्र अब्दुल्ला ने तो यह बयान भी दे दिया है कि ये चुनाव परिणामों के बाद &nbsp;भाजपा की आंखें खुल जानी चाहिए।</p>



<p> दरअसल ये चुनाव परिणाम उमर अब्दुल्ला के लिए यह चेतावनी लेकर &nbsp;आए हैं कि जम्मू कश्मीर की जनता ने अलगाव वाद को नकार कर राष्ट्र वाद को चुना है।</p>



<p>उनके और पीडीपी प्रमुख मेहबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं के लिए यही बेहतर होगा कि मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर को राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल करने के फैसले का समर्थन राज्य के विकास की पहल में सहभागी बनें।</p>



<p></p>
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		<title>भगवान कहाँ रहते हैं पूजा के लिये बुलवाया&#8230;..</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Dec 2020 10:46:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[नेतागिरी]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भगवान कहाँ रहते हैंएक ब्राह्मण था, वह अपने यजमानों के घरों पर जाकर पूजा पाठ करके  अपना जीवन यापन किया करता था। एक बार उस ब्राह्मण को नगर के सबसे&#8230; </p>
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<p><a href="https://go.onelink.me/107872968?pid=InProduct&amp;c=Global_Internal_YGrowth_AndroidEmailSig__AndroidUsers&amp;af_wl=ym&amp;af_sub1=Internal&amp;af_sub2=Global_YGrowth&amp;af_sub3=EmailSignature" target="_blank" rel="noreferrer noopener">भगवान कहाँ रहते हैं</a><br>एक ब्राह्मण था, वह अपने यजमानों के घरों पर जाकर पूजा पाठ करके  अपना जीवन यापन किया करता था। एक बार उस ब्राह्मण को नगर के सबसे धनाड्य व्यक्ति  ने पूजा के लिये बुलवाया । </p>



<p>वह ब्राह्मण नगर के सबसे धनी व्यक्ति बुलावा पाकर प्रशन्नता व उल्लास के साथ  पूजा करने गया। पूजा सम्पन्न कराकर जब ब्राह्मण घर को लौटने लगा, तब उस धनवान व्यक्ति ने ब्राह्मणसे एक सवाल किया, </p>



<p>&#8220;हे ब्राह्मण देव ! आप भगवान की पूजा करते हैं तो यह बतायें कि भगवान कहाँ रहते हैं ? उनकी नजर किस ओर है </p>



<p>और भगवान क्या कर सकते हैं ?उस धनवान के प्रश्न को सुन ब्राह्मण अचंभित हो गया और कुछ समय विचार करने के बाद उसने धनवान से कहा, &#8220;महोदय ! इस सवाल के जवाब के लिए मुझे समय दीजिए।&#8221;</p>



<p><br>* उस धनवान व्यक्ति ने ब्राह्मण को एक माह का समय दिया और कहा सही उत्तर देने पर आपको एक बहुत बड़ी राशि इनाम में दूंगा जिससे आपकी गरीबी दूर हो जाएगी। ब्राह्मण अपने घर में प्रतिदिन इसी सोच में उलझा रहता </p>



<p>कि इसका जवाब क्या होगा। ऐसा करते-करते समय बीतता गया और एक माह का समय खत्म होने में कुछ ही दिन शेष रह गये। समय बीतने के साथ ब्राह्मण की चिंता भी बढ़ने लगी और वो जवाब न मिलने के कारण ब्राह्मण उदास रहने लगा।</p>



<p><br>*एक दिन ब्राह्मण को चिंतित देख ब्राह्मण के पुत्र ने कहा, पिता जी आप इतने उदास क्यों हैं।*<br>*तब ब्राह्मण ने कहा, &#8220;बेटा ! कुछ दिनों पहले में पूजा कराने अपने शहर  सबसे अमीर घराने में गया हुआ था</p>



<p>, पूजा सम्पन्न कराकर जब मैं  वहां वापस आने की तैयारी कर रहा था तब उन महासय ने मुझसे एक सवाल पूछा थाकि भगवान कहाँ रहते हैं ?  भगवान की नजर किस ओर है और भगवान क्या कर सकते हैं?</p>



<p> उन महाशय के सवाल का जवाब मुझे उस समय नही सुझा तो मैने उनसे कुछ समय मांगा था, जिसके जवाब के लिये उन्होंने  मुझे एक माह की समय दिया था, और वह एक माह बीतने वाला है लेकिन उन प्रश्नों के जवाब मेरे पास नहीं हैं</p>



<p> इसलिए मैं चिंतित हूँ क्योंकि सही उत्तर  देने पर वो मुझको बहु बड़ी राशि इनाम में देंगे जिससे हमारी गरीबी दूर हो जाएगी! *ब्राह्मण की बात सुनकर उनका पुत्र बोला, &#8220;पिताजी ! इनका जवाब मैं उन महाशय को दूँगा। आप मुझे साथ ले चलिये।&#8221;*<br></p>



<p>*एक माह पूरा हुआ तब ब्राह्मण अपने पुत्र को लेकर उस धनवान के यहाँ गया और उन महाशय से कहा, &#8220;महोदय ! आपके सवालों का जवाब मेरा पुत्र देगा।&#8221; उस धनवान ने ब्राह्मण के पुत्र से उन सवालों को दुबारा पूछते हुए</p>



<p> कहा कि बताओ भगवान कहाँ रहते हैं? भगवान की नजर किस ओर है तथा भगवान क्या कर सकते हैं ?*<br></p>



<p>उस ब्राह्मण पुत्र ने उस धनवान से कहा, &#8220;महोदय!  क्या आपके यहाँ पहले अतिथि का आदर सम्मान नहीं किया जाता है? &#8220;</p>



<p>  यह सुनकर उस धनवान को थोड़ी लज्जित महसूस हुई।  पहले उस बालक को आदर सत्कार के साथ स्थान दिया , फिर उसके पीने हेतु </p>



<p>सेवक को एक ग्लास दूध लाने को कहा। वह बालक दूध के गिलास को पकड़ कर दूध में अंगुली डालकर घुमाकर बार-बार दूध को बाहर निकालकर देखने लगा। यह देख धनवान व्यक्ति ने पूछा, &#8220;ये क्या कर रहे हो ?&#8221;</p>



<p><br>*बालक ने कहा, &#8220;सुना है दूध में मक्खन होता है। मैं वही देख रहा हूँ कि दूध में मक्खन कहाँ है ? आपके घर से मिले दूध से तो मक्खन ही गायब है।&#8221;</p>



<p><br>उस धनवान ने कहा, &#8220;दूध में मक्खन होता है, परन्तु वह ऐसे दिखाई नहीं देता। जब दूध को जमाकर दही बनाया जाता है और फिर दही को मथा जाता हैं तब जाकर मक्खन प्राप्त होता है।&#8221;<br>*ब्राह्मणके पुत्रने कहा, &#8220;महाशय !</p>



<p> यह आपके पहले सवाल का जवाब है। जिस तरह दूध से दही और फिर दही को मथनेसे मक्खन प्राप्त होता है, </p>



<p>उसी प्रकार परमात्मा प्रत्येक जीव के अन्दर विद्यमान होते है परन्तु उन्हें पाने के लिये सच्ची भक्ति की आवश्यकता होती है।</p>



<p> मन से ध्यानपूर्वक भक्ति करने पर आत्मा में छुपे हुए परमात्मा का आभास होता है।&#8221;*<br>वह धनवान ब्राह्मण के पुत्र के इस जवाब से खुश हुआ और कहा अब मेरे दूसरे सवाल का जवाब दो, भगवान किस ओर देखते हैं ? </p>



<p>उस बालक ने कहा, &#8220;महोदय! इसका जवाब मैं दूँगा परन्तु मुझे इसके लिये एक मोमबत्ती की आवश्यकता है।&#8221;</p>



<p> धनवान व्यक्ति  ने तुरन्त मोमबत्ती मंगाई और उस बालक को दी।<br>*उस बालक ने मोमबत्ती को जलाकर कहा, &#8220;महोदय ! आप बतायें, इस मोमबत्ती की रोशनी किस ओर है ?&#8221; उस धनवान ने कहा, </p>



<p>&#8220;इसकी रोशनी चारों दिशा में एक समान है।&#8221; तब उस बालक ने कहा, &#8221; महोदय ! यही आपके दूसरे सवाल का जवाब है।</p>



<p> क्योंकि परमात्मा सर्वदृष्टा हैं और उनकी नजर सभी प्राणियों के कर्मों की ओर परस्पर रहती है।&#8221; वह धनवान व्यक्ति ब्राह्मण पुत्र के इस  जवाब से अत्यधिक प्रसन्न हो गया </p>



<p>और अब वोअन्तिम प्रश्न के उत्तर जानने हेतु और भी अधिक उत्सुक हो गया।<br></p>



<p>*उस धनवान ने कहा, &#8220;मेरे अन्तिम सवाल का जवाब दो कि, भगवान क्या कर सकते हैं ?&#8221; बालक ने कहा, &#8216;महोदय ! मैं इस सवाल का उत्तर अवश्य दूँगा परन्तु इसके लिये मुझे आपकी जगह पर और आपको मेरी जगह पर आना होगा।&#8221;</p>



<p>*<br>धनवान को तो उत्तर जाने की उत्सुकता थी, उसने अपनी सहमति दे दी। वह बालक धनवान के सिहासन पर जा बैठा और कहा, &#8220;महोदय ! आपके अन्तिम सवाल का जवाब यह है, आपने कहा था कि भगवान क्या कर सकते हैं ?</p>



<p> तो भगवान यह कर सकते कि मुझ जैसे रंक को आपके सिहासन पर बैठा सकते हैं, और आप जैसे धनवान को मुझ जैसे सवाली के स्थान पर, अर्थात ईश्वर राजा को रंक और रंक को राजा बना सकते हैं । यह आपके अन्तिम सवाल का जवाब है।&#8221;</p>



<p> धनवान व्यक्ति उस ब्राह्मण पुत्र के जवाब से अत्यधिक प्रसन्न हुआ और उसे अपना सलाहकार बना लिया।इस कथा का तात्पर्य है</p>



<p> कि भगवान हर एक जीव के ह्रदय में निवास करते हैं। परमात्मा के साथ प्रेम करेंगे तो वह आपको सही मार्ग दिखाएंगे</p>



<p> इसलिए हर जीव को सतकर्म, पूजा-पाठ करतेरहना चाहिए। जिससे आप अपने अन्दर की उस शक्ति से जुड़ सकें जो आपके भीतर ही मौजूद है लेकिन आप उसे पहचान नहीं पा रहे हैं ।ॐश्री राम कृष्ण हरि.<img decoding="async" alt="🙏" src="https://mail.google.com/mail/e/1f64f"><img decoding="async" alt="🙏" src="https://mail.google.com/mail/e/1f64f"><img decoding="async" alt="🚩" src="https://mail.google.com/mail/e/1f6a9"><img decoding="async" alt="🙏" src="https://mail.google.com/mail/e/1f64f"><img decoding="async" alt="🙏" src="https://mail.google.com/mail/e/1f64f">विजय कुमार निगम <img decoding="async" alt="🙏" src="https://mail.google.com/mail/e/1f64f"><img decoding="async" alt="🙏" src="https://mail.google.com/mail/e/1f64f"><a href="https://go.onelink.me/107872968?pid=InProduct&amp;c=Global_Internal_YGrowth_AndroidEmailSig__AndroidUsers&amp;af_wl=ym&amp;af_sub1=Internal&amp;af_sub2=Global_YGrowth&amp;af_sub3=EmailSignature" target="_blank" rel="noreferrer noopener">&#8211;</a> </p>
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		<title>कांग्रेस नेताओं की बैठक : प्रासंगिकता का प्रश्न</title>
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		<pubDate>Tue, 22 Dec 2020 11:35:15 +0000</pubDate>
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<p><br>कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की शनिवार को सोनिया गांधी के साथ हुई बैठक की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। जब से पार्टी के 23 बड़े नेताओं ने उन्हें पत्र लिखकर कांग्रेस के अंदरूनी हालात पर असंतोष जताया था, तभी से इस कथित असंतुष्ट गुट को लेकर पार्टी में एक तरह की असहजता देखी जा रही थी। बैठक में हुई खुली बातचीत से रिश्तों में जमी बर्फ के पिघलने की शुरुआत जरूर हुई और यह पार्टी के अंदर माहौल बदलने में कुछ मदद भी कर सकता है। लेकिन जिस गंभीर समस्या से कांग्रेस जूझ रही है उससे उबरने के लिए उसे अभी बहुत कुछ करना होगा। शनिवार को हुई बैठक में जिन गलतफहमियों के दूर होने की बात की जा रही है, वे गलतफहमियां आखिर हैं क्या और क्यों पैदा हुईं?<br>पुरानी और नई पीढ़ी के विवाद के पीछे भी वही मूल समस्या है जिसे राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों में हुई हार के बाद उठाया था। उनका कहना था कि मैं अकेला बीजेपी से लोहा लेता रहा और पार्टी के सभी पुराने नेता अपने अपने बेटों को आगे बढ़ाने में लगे रहे। चाहे पी चिदंबरम हों या अशोक गहलोत या फिर कमलनाथ, सबकी प्राथमिकता अपने बेटों को स्थापित करने की थी। असम में भी पार्टी के सामने मूल दुविधा यही थी। तरुण गोगोई का पुत्रप्रेम तत्कालीन कांग्रेस नेता हेमंत बिस्वसर्मा की राह में आड़े आ रही थी। उन्होंने राहुल गांधी के सामने अपनी समस्या रखी, पर राहुल के पास कुछ कहने को नहीं था। नतीजा यह कि बिस्वसर्मा बीजेपी में चले गए और उसके लिए नॉर्थईस्ट में संभावनाओं के द्वार खोल दिए। हर राज्य में ऐसे नेता नए उभरते नेतृत्व की राह रोक कर खड़े रहेंगे तो कोई अध्यक्ष पार्टी कार्यकर्ताओं को आखिर किस तरह से भरोसे में लेगा?<br>इस मूल सवाल का जवाब कांग्रेस को तलाशना है अध्यक्ष चाहे राहुल गांधी बनें या कोई और। दूसरा इसी से जुड़ा मसला है कांग्रेस के अंदर की कार्य संस्कृति का। चुनाव जीतना और सत्ता में पहुंचना तो अलग सवाल है, अगर कांग्रेस एक प्रभावी और कारगर पार्टी बनना चाहती है तो भी उसे खुद को एक ऐसे संगठन में तब्दील करना होगा जिसमें समाज की मौजूदा हलचलों के लिए और समकालीन आंदोलनों के लिए पूरी गुंजाइश रहे। चाहे शाहीन बाग हो या मौजूदा किसान आंदोलन, अगर सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े तत्व उसे देशविरोधी साबित करने में लगे हैं तो देश की विपक्षी पार्टी में इतना माद्दा होना चाहिए कि अपनी बांहें खोल कर इन आंदोलनों को अपने में समाहित करे और यह साबित करे कि देश का दायरा सत्ता की इच्छा से छोटा-बड़ा नहीं हो जाता। इन दो मोर्चों पर कांग्रेस अपनी उलझन दूर कर सकी तो कम से कम इस दौर में अप्रासंगिक होते जाने के खतरे से बच जाएगी।</p>
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		<title>खत्म हो गतिरोध राजहठ व किसान हठ से न बनेगी बात</title>
		<link>https://janmudda.com/dead-end-rajhat-and-farmers-will-not-make-a-difference/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Dec 2020 11:48:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार द्वारा लाये गये कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ लामबंद किसान संगठनों के साथ कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद अब केंद्र सरकार की तरफ से लचीला&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><br>केंद्र सरकार द्वारा लाये गये कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ लामबंद किसान संगठनों के साथ कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद अब केंद्र सरकार की तरफ से लचीला रुख अपनाते हुए नयी पहल हुई है।</p>



<p> जिसे किसान संगठनों के नेताओं ने सिरे से खारिज कर दिया है और तीनों कृषि सुधार कानूनों को निरस्त करने की मांग दोहरायी है।</p>



<p> सरकार के नीतिगत फैसलों पर बल देते हुए बृहस्पतिवार को आयोजित प्रेस कानफ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान सरकार के प्रस्तावों पर फिर से विचार करें।</p>



<p> उन्होंने एमएसपी पर आश्वासन देते हुए किसानों से बातचीत के लिये हर वक्त दरवाजे खुले होने की बात कही।</p>



<p> केंद्र के नये प्रस्तावों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लिखित आश्वासन देने और निजी मंडियों में कृषि उपजों पर समान कर लगाने का प्रस्ताव दिया गया था।</p>



<p>\ सरकार ने सुधार कानूनों से जुड़ी किसानों की अन्य आशंकाओं को भी दूर करने का प्रयास किया है</p>



<p>, जिनको लेकर किसान विरोध जताते रहे हैं। कॉरपोरेट फार्मिंग से जुड़ी कुछ शंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए सरकार का कहना है</p>



<p> कि खेती के लिये किसान की जमीन लेने वाली कोई कंपनी जमीन पर कर्ज नहीं ले सकेगी। सरकार किसी कृषि भूमि विवाद पर दीवानी अदालत में अपील हेतु संशोधन के लिये भी तैयार है। </p>



<p>सरकार ने किसानों को आश्वस्त करने का प्रयास किया है कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से जुड़े प्रावधानों को और स्पष्ट किया जा सकता है।</p>



<p> साथ ही यह भी कि बिजली बिल भुगतान की व्यवस्था में भी कोई बदलाव नहीं किया जायेगा। इस बाबत समाधान हेतु अध्यादेश के विकल्प का भी जिक्र है</p>



<p> लेकिन किसान संगठनों ने सरकार के प्रस्तावों को न केवल सिरे से खारिज किया है बल्कि आंदोलन को और तेज करने की बात कही है।</p>



<p> साथ ही दिल्ली-जयपुर व दिल्ली-आगरा हाईवे को जाम करने और चौदह दिसंबर को देशव्यापी प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।</p>



<p><br>वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिये फिलहाल तैयार नजर नहीं आती।</p>



<p> लेकिन दिल्ली के दरवाजे पर लगातार दो सप्ताह से जारी किसान आंदोलन और इसके समर्थन में विपक्षी राजनीतिक दलों शासित राज्यों में आंदोलन की सुगबुगाहट ने केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ाई हैं।</p>



<p> वहीं विदेशों में पंजाबी अस्मिता से जुड़े लोगों के किसान आंदोलन के समर्थन में खुलकर आने का भी अच्छा संदेश नहीं जा रहा है।</p>



<p> निस्संदेह कोरोना संकट के बीच ठंड में किसानों का आंदोलित होना अच्छा नहीं कहा जा सकता। ऐसे में न तो राजहठ से बात बनेगी,</p>



<p> न किसान हठ से। इसमें दो राय नहीं कि किसान आंदोलन का अपना तार्किक आधार है, लेकिन आंदोलन की तपिश में रोटी सेंकने वाले राजनीतिक दलों व संगठनों की भी कमी नहीं है।</p>



<p> निस्संदेह अब तक किसान आंदोलन बेहद संयमित और शांतिपूर्ण रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार का भी दायित्व बनता है कि मिल-बैठकर समस्या का शीघ्र समाधान निकालने का प्रयास करे। ऐसा करना दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है </p>



<p>लेकिन सरकार की जिम्मेदारी कुछ ज्यादा है, क्योंकि किसान आंदोलन से सामान्य जनजीवन भी बाधित होता है। मंगलवार की अनिर्णायक बैठक</p>



<p>, बुधवार की आधिकारिक वार्ता स्थगित होने और सरकार के नये प्रस्तावों को किसान संगठनों द्वारा खारिज किये</p>



<p> जाने के बाद नये सिरे से समाधान की कोशिश की जानी जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष विश्वास बहाली के प्रयास करें। भरोसे का संकट वार्ता में बड़ा व्यवधान है।</p>



<p> सरकार किसानों की चिंताओं को दूर करने का भरोसेमंद विकल्प दे। वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं के बयानों में भी संयम की जरूरत है।</p>



<p> पंजाब के किसान राज्य में स्थापित एक मजबूत सरकारी खरीद प्रणाली को लेकर आशंकित हैं। सरकार को महसूस करना चाहिए कि हरित क्रांति का अगुआ किसान आज घाटे की खेती के संकट से जूझ रहा है।</p>



<p> सरकार यह भी महसूस करे कि कोरोना संकट के दौरान कृषि क्षेत्र ही था, जिसने न केवल आर्थिक संकट से देश को उबारा बल्कि देश की खाद्य शृंखला को मजबूती भी दी।</p>



<p></p>
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		<title>बंगाल में सियासी &#8216;युद्ध&#8217;    मिलिंद जानराव (राजनीतिक विश्लेषक)</title>
		<link>https://janmudda.com/political-war-in-bengal-milind-janrao-political-analyst/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Dec 2020 14:15:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव  की करीब आती तारीखों के साथ ही बयानबाजी का दौर तेज होता जा रहा है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सामने अभी बीजेपी  ही सबसे बड़ी&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><br>पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव  की करीब आती तारीखों के साथ ही बयानबाजी का दौर तेज होता जा रहा है।</p>



<p> सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सामने अभी बीजेपी  ही सबसे बड़ी विपक्षी दल के रूप में खड़ी नजर आ रही है।</p>



<p> दोनों ही दलों में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। सीएम ममता बनर्जी कभी पीएम नरेंद्र मोदी की तुलना हिटलर से करती हैं</p>



<p> तो कभी बीजेपी अध्यक्ष के लिए नड्डा-फड्डा-चड्ढा जैसे शब्द का प्रयोग कर रही हैं।ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती टीएमसी की आंतरिक कलह बनी हुई है।</p>



<p> शुभेंदु अधिकारी, मिहिर गोस्वामी, नियामत शेख, शीलभद्र दत्ता जैसे पार्टी के कई कद्दावर नेताओं की नाराजगी और बगावती तेवर आने वाले चुनाव में ममता के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं।</p>



<p>पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था ममता बनर्जी के लिए बड़ी मुश्किल बनी हुई है। लेफ्ट दल, टीएमसी के बीच राजनीतिक हिंसा के दौर चला।</p>



<p> डायमंड हार्बर में बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा के काफिले पर हुए हमले पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।</p>



<p> ममता के लिए कानून व्यवस्था को बेहतर करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।बीजेपी पश्चिम बंगाल में 200 सीटों को जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है।</p>



<p> पिछले महीने पश्चिम बंगाल में अमित शाह के दौरे के बाद से बंगाल बीजेपी यूनिट की रणनीति में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है।</p>



<p> पार्टी अब ममता सरकार पर पहले से ज्यादा आक्रामक हो गई है। जे पी नड्डा, कैलाश विजयवर्गीय सहित कई कद्दावर नेता संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।</p>



<p> इससे ममता के माथे पर बल पड़ना लाजिमी है।ममता हमेशा से जनाधार वाली नेत्री रही हैं। लेफ्ट के 35 साल के शासन को उन्होंने उखाड़ फेका था। </p>



<p>लगातार दो बार बड़े अंतर से चुनाव जीतकर सत्ता की कुर्सी भी बरकरार रखी। लेकिन बीते कुछ समय में बीजेपी बंगाल में मजबूत विकल्प बनकर सामने आई है। </p>



<p>2016 के विधानसभा चुनाव में महज 3 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने 2019 के लोकसभा में 18 सीटें जीतकर चौंका दिया था। बीजेपी हमेशा ममता पर मुस्लिम कार्ड का आरोप लगाती है।</p>



<p> और पिछले साल CAA-NRC मसले पर ममता के स्टैंड का भी बीजेपी फायदा उठाएगी।ममता बनर्जी की एक और बड़ी चिंता पार्टी में भरोसेमंद चेहरों की कमी का बढ़ना है।</p>



<p> मुकुल रॉय जैसे कद्दावर नेता के बीजेपी खेमे में शामिल हो जाने के बाद अब भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद से कई सीनियर नेताओं में नाराजगी है।</p>



<p> इसके साथ ही चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की बढ़ती दखलअंदाजी भी पार्टी के कई नेताओं को रास नहीं आ रही है। </p>



<p>ऐसे में ममता के लिए बड़ी चुनौती सभी भरोसेमंद साथियों को साथ बनाए रखने की होगी।</p>



<p></p>
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		<title>प्रतिष्ठित सम्मानों की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Dec 2020 10:06:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कृष्णमोहन झा/केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के वयोवृद्ध नेता प्रकाश सिंह बादल ने पद्मविभूषण सम्मान लौटा कर&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><br>कृष्णमोहन झा/<br>केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के</p>



<p> वयोवृद्ध नेता प्रकाश सिंह बादल ने पद्मविभूषण सम्मान लौटा कर आंदोलनरत किसानों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।</p>



<p>उनका यह फैसला पंजाब में अकाली दल को अपना खोया हुआ जनाधार पुन: वापस पाने में कितनी मदद करेगा</p>



<p> यह तो आगे आने वाला समय ही बताएगा परंतु पद्मविभूषण सम्मान लौटाने के उनके इस फैसले ने फिलहाल कुछ सवाल अवश्य खड़े कर दिए हैं।</p>



<p>उनके इस फैसले से मुझे गत लोकसभा चुनावों का  प्रसंग याद आ रहा है जब वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से दुबारा चुनाव लडने जा रहे </p>



<p>प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करने हेतु राजग के घटक दलों के वरिष्ठ नेता वाराणसी पहुंचे थे।</p>



<p> स्वाभाविक रूप से  उनमें अकाली दल की ओर से प्रकाशसिंह बादल भी शामिल थे। तब प्रधानमंत्री मोदी ने उनके प्रति विशेष सम्मान व्यक्त करते हुए</p>



<p>  उनके सादर चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। प्रधानमंत्री मोदी की इस अद्भुत विनम्रता ने प्रकाश सिंह बादल को अभिभूत कर दिया था।</p>



<p> शायद प्रकाश सिंह बादल ने भी उस स्थिति की कल्पना नहीं की थी लेकिन मोदी तो वयोवृद्ध अकाली नेता के सामने सश्रद्धया विनयावनत होकर सारे देश वासियों से भूरि भूरि प्रशंसार्जन के अधिकारी बन चुके थे।</p>



<p> यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि प्रकाश सिंह बादल को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के बाद देश के दूसरे सबसे बड़े सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित करने का फैसला केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने अपने प्रथम कार्यकाल के प्रथम वर्ष में ही  कर लिया था।</p>



<p>गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के वर्चस्व  वाले जनता दल यूनाइटेड की भांति अकाली दल भी राजग में 90 के दशक से भाजपा का सहयोगी दल था</p>



<p> लेकिन कुछ माह पूर्व मोदी सरकार द्वारा संसद में पेश तीन क़ृषि विधेयकों से नाराज़ होकर उसनेे राजग से संबंध तोड़ लिए थे।</p>



<p>अकाली दल के कोटे से केंद्र सरकार में हरसिमरन कौर ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तबसे अकाली दल और मोदी सरकार के बीच तल्खियां बढ़ती जा रही हैं।</p>



<p> यूं तो अकाली दल ने नए कृषि विधेयकों को किसान विरोधी बताते हुए राजग और मोदी सरकार से नाता तोड़ा है परन्तु इसके पीछे असली वजह यह मानी जा रही है </p>



<p>कि कृषि विधेयकों के विरोध में सरकार से नाता  तोडऩे का अकाली दल का यह फैसला वास्तव में पंजाब के किसानों के बीच अपना खोया हुआ जनाधार पुन: वापस पाने की एक कोशिश है। सबसे बड़ा सवाल यह है</p>



<p> कि जब इसी साल जून में मोदी सरकार ने देश में नए कृषि सुधारों का मार्ग प्रशस्त करने हेतु अध्यादेश जारी किए थे तब अकाली दल ने उनका विरोध क्यों नहीं किया।</p>



<p> अकाली दल चाहता तो उसी समय सरकार पर दबाव बनाकर उक्त अध्यादेशों के उन प्रावधानों में बदलाव के लिए सरकार को राजी कर सकता था जिन्हें वह आज किसान विरोधी बताकर उनका विरोध कर रहा है।</p>



<p>  मेरा मानना तो यह है कि प्रकाश सिंह बादल के प्रति प्रधानमंत्री मोदी के मन में जो विशेष आदर भाव है</p>



<p>  उसे ध्यान में रखते हुए अगर बादल जून में ही प्रधानमंत्री मोदी से  कृषि सुधारों पर सकारात्मक विचार विमर्श करते</p>



<p> तो उसी समय इस समस्या का संतोष जनक समाधान निकलने की संभावनाएं बलवती हो सकती थीं और आज प्रकाश सिंह बादल को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान लौटाने की आवश्यकता ही महसूस नहीं होती।</p>



<p> निश्चित रूप से बादल के इस अप्रत्याशित फैसले ने प्रधानमंत्री मोदी को  असहज महसूस करने पर विवश कर दिया होगा।बादल के इस फैसले से प्रधानमंत्री मोदी के मन में उनके प्रति विद्यमान श्रद्धा भाव में किंचित मात्र परिवर्तन होने की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती</p>



<p> परंतु बादल से यह अपेक्षा अवश्य की जा सकती है कि वे पद्मविभूषण सम्मान के गौरव और गरिमा को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करें।हमें अब पूरी गंभीरता के साथ इस प्रश्न का उत्तर भी खोजना  होगा </p>



<p>कि पिछले कुछ सालों से  सरकार के किसी कदम का विरोध करने के लिए अथवा अपनी बात मनवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की मंशा से गौरवशाली नागरिक सम्मानों को लौटा देने का जो चलन शुरू हुआ है</p>



<p> उसका औचित्य आखिर कैसे सिद्ध किया जा सकता है। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व कथित असहिष्णुता के विरोध में देश के कुछ प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने भी उन्हें अतीत में दिए गए प्रतिष्ठित सम्मान लौटा दिए थे। सवाल यह उठता है</p>



<p> कि क्या किसी भी मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए प्रतिष्ठित सम्मानों को लौटाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं हो सकता। </p>



<p>विख्यात गीतकार स्व. नीरज ने भी पुरस्कार वापसी को ग़लत ठहराया था। दरअसल किसी भी प्रतिष्ठित सम्मान की वापसी  उस सम्मान की गरिमा को कम करने जैसा ही है</p>



<p> और विरोध की अभिव्यक्ति के नाम पर सम्मान लौटाने से इन प्रतिष्ठित सम्मानों की उपादेयता पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं।</p>



<p> अब यह सिलसिला यहीं  थम जाए तभी हम इन प्रतिष्ठित सम्मानों की गरिमा और गौरव के अक्षुण्ण बने रहने के प्रति निश्चिंत हो सकते हैं।</p>



<p> इसलिए आंदोलन रत किसानों के प्रति अपना समर्थन और सरकार के प्रति विरोध जताने के लिए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और खेल जगत की दिग्गज हस्तियों ने अतीत में उन्हें मिले</p>



<p> सम्मान  लौटाने की जो घोषणा की है उस पर उन्हें गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए । सम्मानों की वापसी किसी समस्या का मार्ग प्रशस्त नहीं कर सकती।</p>
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		<title>छोटे चुनाव से भाजपा का बड़ा संदेशहैदराबाद  कॉर्पोरेशन के चुनाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Dec 2020 12:10:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव में भाजपा ने जिस तरह राष्ट्रीय चुनाव की तरह आक्रामक रणनीति बनायी, उसके परिणाम सामने हैं। आज भाजपा तेलंगाना की राजनीति की चाबी माने&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p><br>ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव में भाजपा ने जिस तरह राष्ट्रीय चुनाव की तरह आक्रामक रणनीति बनायी, उसके परिणाम सामने हैं।</p>



<p> आज भाजपा तेलंगाना की राजनीति की चाबी माने जाने वाले जीएचएमसी चुनाव परिणामों में पिछली बार की चार सीटों के मुकाबले 48 सीटों तक पहुंची है।</p>



<p> दरअसल, जीएचएमसी के इलाके में 24 विधानसभा सीटें पड़ती हैं और इस कॉर्पोरेशन का सालाना बजट साढ़े पांच हजार करोड़ से अधिक है। </p>



<p>भाजपा ने रणनीति बनाकर एक तीर से कई शिकार किये हैं। इसे भाजपा के दक्षिण में विस्तार के अभियान के तौर पर देखा जा रहा है।</p>



<p> भाजपा ने कहीं न कहीं तेलंगाना में यह संदेश देने का भी प्रयास किया है कि राज्य की विधानसभा में भले ही कांग्रेस पार्टी विपक्ष की भूमिका में रही हो लेकिन अब भविष्य में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति यानी टीआरएस का मुकाबला मुख्य विपक्ष के रूप में भाजपा से होने वाला है।</p>



<p> यह भी कि अब मुकाबला आक्रामक भाजपा से नियमित रूप से होगा। दरअसल, टीआरएस सुप्रीमो के. चंद्रशेखर राव के गढ़ में नवंबर में हुए दुब्बका विधानसभा सीट का उपचुनाव जीतने के बाद से ही भाजपा के हौसले बुलंद रहे हैं।</p>



<p> यही वजह है कि जीएचएमसी चुनाव को भाजपा ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर लड़ा और कांग्रेस को चुनावी परिदृश्य से बाहर करने में सफलता पायी। कुल मिलाकर भाजपा तेलंगाना में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिये आगे बढ़ चुकी है।</p>



<p> कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी से मुकाबले के बाद भाजपा का अगला रणक्षेत्र तेलंगाना ही होगा।</p>



<p><br>कुल मिलाकर भाजपा ने जीएचएमसी चुनाव में आक्रामक रणनीति और अप्रत्याशित सफलता से तेलंगाना के भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।</p>



<p> भाजपा ने पूरा चुनाव ही मनोवैज्ञानिक तरीके से लड़ा। हैदराबाद में नगर निगम के चुनाव पहले कभी इस तरह से नहीं लड़े गये।</p>



<p> इस बार चुनाव में बिजली, पानी और सफाई के बजाय सर्जिकल स्ट्राइक, रोहिंग्या मुस्लिम, बांग्लादेश व पाकिस्तान जैसे मुद्दे उछले।</p>



<p> केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के रोड शो से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम बड़े भाजपा के नेता चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आये।</p>



<p> भाजपा मतों का ध्रुवीकरण कराने में भी कामयाब रही। वहीं भाजपा ने तेलंगाना की जनता को यह बताने का प्रयास किया कि टीआरएस के साथ एआईएमआईएम की अंदरखाते भागीदारी है।</p>



<p> साथ ही उस आरोप से मुक्त होने का प्रयास किया जो अक्सर लगाया जाता है कि एआईएमआईएम भाजपा की बी-टीम है।</p>



<p> बहरहाल, राज्य के युवा नेतृत्व और आक्रामक विपक्ष के रूप में भाजपा ने संदेश देने का प्रयास किया </p>



<p>कि तेलंगाना की राजनीति में भाजपा अब एक मजबूत विपक्ष के रूप में टीआरएस का विकल्प बनने की तैयारी में है जो पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ तीसरा फ्रंट बनाने की कवायद में लगी थी।</p>



<p> बहरहाल, जिस तेलंगाना में भाजपा कभी बड़ी पार्टी नहीं रही वहां जीएचएमसी चुनाव परिणामों ने उसकी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज करा दी। यह टीआरएस के लिये अपना गढ़ बचाने की चुनौती है।<br>00</p>



<p></p>
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