यूपी सरकार इस वर्ष भी गन्ना किसानों को मिलेगा 325 रुपये प्रति क्विंटल ।


यूपी के गन्ना किसानों को मौजूदा पेराई सत्र में भी गन्ने का वही भाव मिलेगा जो लगातार पिछले दो पेराई सत्र से मिलता रहा है। रविवार की देर रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन से हुए फैसले में मंत्रिपरिषद ने गन्ना विकास विभाग के इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दी। गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस पेराई सत्र में भी गन्ना किसानों को गन्ने की रिजेक्टेड वैरायटी के लिए 310, सामान्य प्रजाति के गन्ने के लिए 315 और अगैती प्रजाति के लिए 325 रूपये प्रति क्विंटल का ही भाव मिलेगा। प्रदेश में अब सबसे ज्यादा अगैती प्रजाति का ही गन्ना बोया जाता है। यह लगातार तीसरा पेराई सत्र है जब गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य नहीं बढ़ाया गया है।
हालांकि अब मौजूदा पेराई सत्र समाप्ति की ओर है और ज्यादातर मिलों में गन्ने की अधिकांश पेराई हो चुकी है, इस बार किसानों को अब तक पुरानी दर पर ही भुगतान होता रहा है अगर मौजूदा पेराई सत्र में गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य बढ़ता तो फिर मिलों को किसानों को बढ़े हुए गन्ना मूल्य के हिसाब से एरियर भी देना पड़ता। अब किसानों को अगले पेराई सत्र का इंतजार रहेगा।

अगले सत्र से इजाफे की उम्मीद
जानकारों का कहना है कि चूंकि अगले साल विधान सभा चुनाव होने हैं इसलिए प्रदेश सरकार आगामी अक्टूबर माह से शुरू होने वाले अगले पेराई सत्र में तो गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य में इजाफा जरूर करेगी। प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार ने सत्ता संभालने के तत्काल बाद 2017-18 के पेराई सत्र में गन्ने के राज्य परामर्शी मूल्य में दस रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया था।

इससे पूर्व सपा सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में दो बार में कुल 65 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य बढ़ा था। 2012-13 के पेराई सत्र में सत्ता संभालने के पहले साल 40 रुपये और अंतिम वर्ष में 25 रुपये, और इसके पहले तत्कालीन बसपा सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में 125 रुपये प्रति क्विंटल का भाव बढ़ाया था।

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