
वाराणसी की एसओजी और कैंट पुलिस ने टकटकपुर के एक फ्लैट में छापेमारी कर आईपीएल पर करोड़ों का सट्टा लगाने वाले 11 बुकीज को गिरफ्तार किया है, जिनमें 9 मुंबई के हैं. महानगरों की पुलिस से बचने के लिए इन्होंने बनारस को सेफ हाउस बनाया था. आईपीएल फाइनल पर 25 करोड़ का दांव लगा था. पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, कैश और फर्जी पासबुक बरामद कर सभी को जेल भेज दिया है.
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. महानगरों में पुलिस की सख्ती से बचने के लिए सट्टेबाजों ने बनारस को अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना (सेफेस्ट प्लेस) बना लिया था. वाराणसी की एसओजी और कैंट थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात एक रिहायशी इलाके में छापेमारी कर आईपीएल मैच पर करोड़ों का सट्टा लगा रहे एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मौके से 11 शातिर सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 9 बुकी अकेले मुंबई के रहने वाले हैं.
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कैंट थाना क्षेत्र के टकटकपुर स्थित एक रिहायशी कॉलोनी के फ्लैट में बड़े पैमाने पर सट्टेबाजी का काला कारोबार चल रहा है. इस इनपुट पर जब एसओजी और स्थानीय पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश किया, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए. कमरे के अंदर दर्जनों लैपटॉप और मोबाइल चालू हालत में थे, जिन पर आईपीएल के भाव चल रहे थे.
करोड़ों के ट्रांजैक्शन और आधुनिक गैजेट्स बरामद
पुलिस ने मौके से भारी संख्या में अत्याधुनिक लैपटॉप, की-पैड और एंड्रॉइड मोबाइल फोन, वॉयस रिकॉर्डर, टैबलेट, इंटरनेट राउटर्स और सट्टे का पूरा हिसाब-किताब रखने वाले कई डिजिटल रजिस्टर बरामद किए हैं. इसके अलावा सट्टेबाजों के पास से भारी मात्रा में नगदी, विभिन्न फर्जी नामों से खोले गए बैंक खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड भी जब्त किए गए हैं. इन फर्जी खातों के जरिए सट्टेबाजी में करोड़ों रुपये का लेन-देन (ट्रांजैक्शन) किया जा रहा था. पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने कबूल किया कि सिर्फ आईपीएल फाइनल मैच पर ही 25 करोड़ रुपये से ज्यादा का दांव लगा हुआ था.
महानगरों के डर से बनारस में बनाया ‘सेफ हाउस’
एसओजी (SOG) प्रभारी गौरव सिंह ने इस बड़े नेटवर्क के तौर-तरीकों का खुलासा करते हुए बताया कि ये सट्टेबाज बेहद शातिर दिमाग के हैं. मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में पुलिस की कड़ी निगरानी और पकड़े जाने के लगातार डर के कारण इस गिरोह ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी को अपना ‘सेफ हाउस’ चुना था. आरोपियों ने पूरे आईपीएल सीजन के दौरान बनारस में पैर जमाने के लिए टकटकपुर की एक शांत रिहायशी कॉलोनी में किराए पर फ्लैट लिया था, ताकि किसी को भनक न लगे. इसी फ्लैट में बैठकर ये पूरे देश के सटोरियों को ऑपरेट कर रहे थे.
टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के सीक्रेट ग्रुप्स से चलता था खेल
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि पकड़े गए आरोपी सामान्य फोन कॉल के बजाय पूरी तरह से डिजिटल और एन्क्रिप्टेड माध्यमों का इस्तेमाल करते थे. इस सिंडिकेट को चलाने के लिए उन्होंने टेलीग्राम और व्हाट्सऐप पर कई सीक्रेट और वीआईपी ग्रुप्स बना रखे थे. इन गुप्त ग्रुप्स के जरिए वे देश के अलग-अलग राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली के सटोरियों से सीधे जुड़े हुए थे और हर मैच पर करोड़ों का दांव लगवा रहे थे. पुलिस ने आईटी एक्ट और जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर सभी 11 आरोपियों को जेल भेज दिया है.