
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हलचल मची हुई है. पार्टी के कई सांसदों और विधायकों ने बगावती तेवर अख्तियार कर लिए है, जिससे TMC प्रमुख ममता बनर्जी की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही है. इस बीच राज्य में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के पद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. TMC ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के उस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई है. पार्टी का आरोप है कि यह फैसला संसदीय परंपराओं और नियमों के खिलाफ है.
वरिष्ठ अधिवक्ता सिरसन्या बंदोपाध्याय ने याचिका दाखिल की है जिस पर 11 जून को जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल बेंच में सुनवाई होने की संभावना है. पार्टी ने कोर्ट से विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के फैसले की न्यायिक समीक्षा करने और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुट द्वारा नामित वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की है.
58 विधायकों ने किया ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब TMC के 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग होकर ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन कर दिया. ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित किए जाने के महज दो दिन बाद उन्होंने 58 विधायकों के समर्थन के साथ नेता प्रतिपक्ष पद पर दावा पेश कर दिया. वहीं एक अन्य निष्कासित विधायक संदीपन साहा को सहायक नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई.
TMC ने की शोभनदेव के नाम की घोषणा
ऋतब्रत बनर्जी के दावे से कुछ घंटे पहले ही TMC ने औपचारिक रूप से घोषणा की थी कि शोभनदेव चट्टोपाध्यायनेता प्रतिपक्ष होंगे. पार्टी ने आशिमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता प्रतिपक्ष एवं फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त किया था.
ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती
ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति का पार्टी नेतृत्व ने विरोध किया है, जिसके बाद अब इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है. टीएमसी सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का फैसला नियमों और संसदीय प्रक्रियाओं का उल्लंघन है. हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि रितब्रत बनर्जी के गुट के पास जरूरी संख्या बल मौजूद था इसलिए उन्हें मान्यता दी गई.
हस्ताक्षर फर्जी होने के आरोप से बढ़ा विवाद
दरअसल इस विवाद की वजह 6 मई को पार्टी द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव है. TMC के बागी विधायक ऋतब्रता और संदीपान साहा ने अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि शोभनदेव चट्टोपाध्यायको मनोनीत करने वाला प्रस्ताव मनगढ़ंत और फर्जी था. उन्होंने यह भी दावा किया कि 6 मई को कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था और कई विधायकों के हस्ताक्षर जाली थे.उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में पार्टी के विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक के नाम वाले दस्तावेज पर उनके और कई अन्य TMC विधायकों के हस्ताक्षर जाली थे.
13 TMC विधायकों के बयान दर्ज
विधानसभा के प्रधान सचिव द्वारा प्रारंभिक जांच के बाद, हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद राज्य के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने जांच अपने हाथ में ले ली. खबरों के मुताबिक सीआईडी ने अब तक 13 TMC विधायकों के बयान दर्ज किए हैं. इनमें बहारुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभाशीष दास ने दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर होने से साफ इनकार कर दिया .
अभिषेक बनर्जी सीआईडी ने भेजा समन
इसी बीच पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए टीएमसी ने ऋतब्रता बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया. इस मामले में सीआईडी ने सोमवार को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को तीसरी बार समन जारी कर मंगलवार को पूछताछ के लिए बुलाया है. हालांकि अभिषेक बनर्जी ने सीआईडी को पत्र लिखकर पेशी के लिए अतिरिक्त समय मांगा है. उन्होंने कहा है कि मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है और वह इस समय दिल्ली में मौजूद हैं. अभिषेक की ओर से पहले भी सीआईडी के नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ का दरवाजा खटखटाया जा चुका है. अब 10 और 11 जून को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.