भारत के SIR मॉडल पर ट्रंप की नजर क्यों? मिड-टर्म से पहले बड़ा फैसला, क्या है इसके पीछे की रणनीति?

पिछले कुछ दिनों से ट्रंप लगातार भारतीय चुनावी व्यवस्था की तारीफ कर रहे हैं. पहले भारतीय चुनाव आयोग की फोटो वाली ID या फिर ये कहें कि फोटो वाली पहचान पसंद आई, अब वो अमेरिका में SIR लाने की वकालत कर रहे हैं. इसको लेकर उन्होंने लंबा-चौड़ा सोशल मीडिया पोस्ट किया है. इसके एक-एक शब्द के मायने आपको समझाएंगे. आखिर ट्रंप की मजबूरी क्या है? आखिर ट्रंप चाहते क्या हैं? 4 प्वाइंट में समझिए अमेरिका में भारत जैसा SIR क्यों ट्रेंड हो रहा है? 

  • सवाल है ट्रंप भारत की तरह अमेरिका में भी वोटर लिस्ट का ‘शुद्धीकरण’ क्यों चाहते हैं?
  • ये भी पूछा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप को भारत जैसा SIR क्यों चाहिए?
  • अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव से पहले SIR वाली तैयारी क्यों हो रही है?

अमेरिका में भी भारत की तरह SIR होगा?

अमेरिका में वोटर लिस्ट की शुद्धता वाली बहस तेज हो चुकी है. जगह-जगह इसकी चर्चा हो रही है. इसको लेकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. पूरी दुनिया में अब बहस इस विषय पर हो रही है कि क्या अमेरिका में भी भारत की तरह SIR होगा? क्या अमेरिका भी वोटिंग प्रक्रिया को SIR से शुद्ध और सत्यापित करेगा? इसे ट्रंप के नए सोशल मीडिया पोस्ट से डिटेल में समझिए कि आखिर ट्रंप की चिंता क्या है? डर क्या है? बेचैनी की असल वजह क्या है?

ट्रंप का दावा है कि अमेरिका में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 24000 से ज्यादा गैर-नागरिक मतदाता मिले. ट्रंप का तर्क रहा है कि गैर-नागरिक मतदाता मुख्य रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देते हैं, जिससे रिपब्लिकन पार्टी और उनकी नीतियां प्रभावित होती हैं. अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिड टर्म चुनाव होना है. इससे ट्रंप की बेचैनी को समझा जा सकता है. 

12 करोड़ 80 लाख मतदाताओं का विश्लेषण

ट्रंप ने अपने दावे को आंकड़े के जरिए पेश किया है. सोशल मीडिया पोस्ट में ये लिखा कि वर्ष 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड का मिलान किया गया है. इसमें 12 करोड़ 80 लाख मतदाताओं का शुरुआती विश्लेषण किया गया, जिसमें 24000 गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान की गई है. इतना ही नहीं ट्रंप ने ये भी संकेत दिए हैं कि बचे हुए 3 करोड़ 20 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी.

ट्रंप का दावा है इस जांच के बाद अमेरिका में गैर-नागरिक मतदाताओं की संख्या बढ़ सकती है. ट्रंप इस पूरे मसले को अमेरिका के हित से जोड़ रहे हैं. उनका कहना है हर हाल में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करना होगा. ट्रंप ने वर्ष 2020 के अमेरिकी चुनाव का जिक्र करते हुए भी कई चौंकाने वाले दावे किए. ट्रंप का कहना है अगर 2020 में अवैध वोटों और गड़बड़ियों को हटाया जाता, तो चुनाव जीत जाते है.

अमेरिका में SIR कैसे बना बड़ा मुद्दा?

खैर ट्रंप के दावों में कितना दम है ये अलग विषय है लेकिन अमेरिका में भारत जैसा SIR की चर्चा खूब हो रही है. वो शब्द ट्रेंड हो रहे हैं जो भारत में भी कई चुनावों से पहले SIR प्रक्रिया के दौरान चर्चा में थे. इन्हीं शब्दों के आधार पर हमने सत्ता का एक शब्दकोष तैयार किया है, जिससे आप समझ सकते हैं कैसे अमेरिका में भी SIR बड़ा विषय बन गया है.

ये शब्द हैं फर्जी वोटर, जिसका जिक्र ट्रंप ने भी किया है. ट्रंप ने ये भी कहा है कि नए कानून से व्यवस्था को दुरुस्त करेंगे. भारत में भी वोट चोरी वाले आरोप लगे थे. ट्रंप भी वोट में गड़बड़ी के दावे कर रहे हैं. इसके अलावा वोटों के शुद्धीकरण पर ट्रंप ने भी जोर दिया है. वोटों के सत्यापन पर भी ट्रंप का फोकस है. कई देशों से अमेरिका में घुसपैठ वाले दावे भी हैं.

ट्रंप अब नया एक्ट लाने की बात कर रहे

चुनाव के समय भी रहे हैं, जिसको लेकर ट्रंप अब नया एक्ट लाने की बात कर रहे हैं. ट्रंप के शब्दकोष की बात करें तो उनके दिमाग भी कई शब्द हैं जैसे भारत जैसे SIR की बात को कर रहे हैं. भारत जैसे फोटो ID कार्ड का जिक्र पहले ही कर चुके हैं. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर पहले ही वो भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ कर चुके हैं.

ट्रंप की बेचैनी को कुछ आंकड़ों से भी समझते हैं. व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक आंकड़े के अनुसार, अमेरिका में मेक्सिकन मूल के बड़ी संख्या में गैर नागरिक वोटर हैं. इनकी संख्या लगभग 3800 है. वहीं कनाडाई मूल के 950 हैं. मतलब ऐसे गैर नागरिक वोटर जिनका जन्म कनाडा में हुआ है लेकिन वो अमेरिका में भी वोटिंग करते हैं.

फिलिपींस और जमैका मूल के 900 वोटर हैं, जर्मन मूल के 700, ब्रिटिश मूल के 650, क्यूबन मूल के 450, वियतनामी मूल के 400, हैती मूल के 400 और दक्षिण कोरियाई मूल के 350 वोटर हैं. ट्रंप के दावे के अनुसार, इसके अलावा भी 14500 वोटर हैं, जिनका जन्म दूसरे देशों में हुआ है लेकिन अमेरिका में उन्हें वोटिंग का अधिकार है वो वोट करते हैं.

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