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	<title>विदेश Archives | Janmudda</title>
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	<title>विदेश Archives | Janmudda</title>
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		<title>BRICS समिट में शामिल होंगे शी जिनपिंग? चीन ने अब तक साधी चुप्पी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Sep 2026 02:46:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत में होने वाली BRICS समिट को लेकर चीन ने अपना समर्थन जताया है, लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नई दिल्ली आने पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है.&#8230; </p>
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<p>भारत में होने वाली BRICS समिट को लेकर चीन ने अपना समर्थन जताया है, लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नई दिल्ली आने पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगी. भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है.&nbsp;</p>



<p>चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग से मंगलवार को पूछा गया कि चीन की ओर से समिट में कौन शामिल होगा. उन्होंने कहा कि चीन BRICS सहयोग को बहुत महत्व देता है और भारत के सफल सम्मेलन आयोजित करने का समर्थन करता है. हालांकि, उन्होंने चीनी डेलिगेशन या जिनपिंग की मौजूदगी पर कोई साफ जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई नई जानकारी होगी तो उसे बताया जाएगा.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मोदी ने 2025 में शी को दिया था न्योता</strong></h3>



<p>भारत ने अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग को 2026 BRICS समिट में आने का न्योता दिया था. भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जिनपिंग ने मोदी के न्योते के लिए धन्यवाद दिया था और भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन किया था. लेकिन न्योता मिलने का मतलब जिनपिंग का सम्मेलन में आना तय होना नहीं है. 8 सितंबर तक चीन ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि शी जिनपिंग नई दिल्ली आएंगे या नहीं.</p>



<p>अगस्त में रायटर्स ने तीन सूत्रों के हवाले से बताया था कि जिनपिंग के समिट में आने की संभावना है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी अधिकारी बड़े डेलिगेशन की तैयारी कर रहे थे. अगर जिनपिंग भारत आते हैं तो यह सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी. हालांकि, यह अभी मीडिया रिपोर्ट है, चीन की आधिकारिक पुष्टि नहीं.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मोदी-जिनपिंग की पिछली मुलाकात कब हुई?</strong></h3>



<p>मोदी और शी की सबसे हालिया आमने-सामने मुलाकात अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में SCO समिट के दौरान हुई थी. मोदी की यह चीन यात्रा 7 साल बाद हुई थी. दोनों नेता इससे पहले अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में BRICS समिट के दौरान मिले थे.</p>



<p>अगर जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो BRICS बैठक के अलावा भारत-चीन संबंधों के लिए भी यह अहम होगा. दोनों देश सीमा विवाद के बाद रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं. फिलहाल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की BRICS समिट में मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है.</p>



<p></p>
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		<title>जर्मनी में बदला सियासी समीकरण, AfD की शानदार जीत से बढ़ी सत्ता की उम्मीद; मर्ज की पार्टी को सिर्फ 17% वोट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 09:32:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट के चुनाव में बड़ी जीत हासिल की. पार्टी को 43.8% वोट मिले. यह पांच साल पहले के मुकाबले&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="981" height="549" src="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/09/videsh.png" alt="" class="wp-image-9078" srcset="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/09/videsh.png 981w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/09/videsh-300x168.png 300w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/09/videsh-768x430.png 768w" sizes="(max-width: 981px) 100vw, 981px" /></figure>



<p>जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट के चुनाव में बड़ी जीत हासिल की. पार्टी को 43.8% वोट मिले. यह पांच साल पहले के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है. हालांकि, सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से AfD तीन सीट दूर रह गई. 83 सदस्यों वाली विधानसभा में AfD को 39 सीटें मिलीं. पार्टी के 35 साल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार उलरिच सीगमुंड ने कहा कि पार्टी ने इतिहास रच दिया है और उसे सरकार बनाने का साफ जनादेश मिला है.&nbsp;</p>



<p>AfD अकेले सरकार बनाना चाहती थी, लेकिन उसे इसके लिए बहुमत नहीं मिला. AfD जर्मनी में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी राज्य में दक्षिणपंथी सरकार बनाने की कोशिश कर रही है. पार्टी ने अल्पमत सरकार बनाने की संभावना भी खारिज कर दी. दूसरी पार्टियों के लिए भी AfD के बिना स्थिर सरकार बनाना मुश्किल होगा.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मर्ज की CDU को बड़ा झटका</strong></h3>



<p>सैक्सोनी-आनहाल्ट में पिछले 24 साल से चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की CDU सत्ता में थी. इस बार CDU को सिर्फ 17.2% वोट और 15 सीटें मिलीं. उसका समर्थन करीब आधा रह गया. सोशल डेमोक्रेट्स को 9.3%, ग्रीन्स को 8.9% और लेफ्ट पार्टी को 8.6% वोट मिले. तीनों को 8-8 सीटें मिलीं. BSW को 5.3% वोट और 5 सीटें मिलीं. चुनाव में रिकॉर्ड 77.8% वोटिंग हुई थी.</p>



<p>AfD की नेता एलिस वीडेल ने कहा कि पार्टी को सरकार बनाने का स्पष्ट जनादेश मिला है. वहीं CDU की महासचिव फ्रांजिस्का हॉपरमैन ने कहा कि उनकी पार्टी AfD के साथ काम नहीं करेगी. उन्होंने AfD को दक्षिणपंथी चरमपंथी पार्टी बताया और रूस के साथ उसके करीबी संबंधों की आलोचना की.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>AfD की नीतियां क्या हैं?</strong></h3>



<p>AfD प्रवासन के खिलाफ सख्त रुख रखती है. वह रिमिग्रेशन यानी प्रवासियों को वापस भेजने की नीति की बात करती है. सीगमुंड बड़े पैमाने पर निर्वासन और जर्मनी आने के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन खत्म करना चाहते हैं. पार्टी सैक्सोनी-आनहाल्ट में होम-स्कूलिंग की अनुमति, स्कूलों में राष्ट्रीय झंडा लगाने और सरकारी संस्थानों में कुछ नीतिगत बदलाव चाहती है. वह यूक्रेन को टैक्सपेयर्स का पैसा देने का विरोध करती है और रूस पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग करती है, हालांकि ये विदेश नीति के फैसले राज्य सरकार के अधिकार में नहीं हैं.</p>



<p>AfD के राज्य संगठन को जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन माना है. पार्टी इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताकर खारिज करती है. पड़ोसी राज्य थ्यूरिंगिया में AfD दो साल पहले सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन सरकार नहीं बना सकी थी. जर्मनी के 16 राज्यों के पास सुरक्षा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काफी अधिकार हैं. ये राज्य संसद के ऊपरी सदन में भी प्रतिनिधित्व करते हैं. सैक्सोनी-आनहाल्ट के पास कुल 69 में से 4 वोट हैं.</p>



<p></p>
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		<title>नेपाल में तबाही का कारण बना ग्लेशियर कॉलैप्स! आखिर कैसे भरभराकर टूटता है बर्फ का पहाड़? समझिए पूरी कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 05:36:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नेपाल के रसुवा जिले में अचानकर आई फ्लैश फ्लड ने भयानक तबाही मचाई है. हजारों लोग लापता हैं. इसमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं. अब तक 160 से&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="984" height="543" src="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/videsh.png" alt="" class="wp-image-9068" srcset="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/videsh.png 984w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/videsh-300x166.png 300w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/videsh-768x424.png 768w" sizes="(max-width: 984px) 100vw, 984px" /></figure>



<p>नेपाल के रसुवा जिले में अचानकर आई फ्लैश फ्लड ने भयानक तबाही मचाई है. हजारों लोग लापता हैं. इसमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं. अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत की खबर सामने आई है. इस फ्लैश फ्लड के आने के पीछे की वजह ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरना बताया जा रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह जानकारी सामने आई है कि ग्लेशियर का निचला हिस्सा करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई से टूटकर लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी में जा गिरा.&nbsp;</p>



<p>ऐसा होने के बाद बर्फ, चट्टान और भारी मलबे का विशाल सैलाब आया. इसे ग्लेशियर कॉलैप्स आइस-रॉक एवलॉन्च कहा जा रहा है. इसी के चलते नदी में अचानक पानी, मलबे और बोल्डर का जबरदस्त बहाव पैदा हुआ और नेपाल के रसुवा इलाके में विनाशकारी फ्लैश फ्लड आ गई. फिलहाल, नेपाल में बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. भारत भी इसमें नेपाल की मदद कर रहा है.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ग्लेशियर कॉलैप्स में भूकंप का कितना रोल?</strong></h3>



<p>बुधवार यानी 26 अगस्त को हुई इस घटना के बाद शुरुआती तौर पर भूकंप को इसकी वजह माना गया. हालांकि, बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण एजेंसी USGS ने कहा कि जिस भूकंपीय गतिविधि को भूकंप समझा गया, वह ग्लेशियर, चट्टानों और बर्फ के टूटकर नीचे गिरने और मलबे के तेज बहाव से पैदा हुई सेसिमिक एनर्जी भी हो सकती है.</p>



<p>नेपाल के भू वैज्ञानिक प्रकाश पोखरेल ने भी कहा कि शुरुआती संकेतों में भूकंप को घटना का संभावित ट्रिगर माना गया था, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भूकंप की वजह ये तबाही आई. अबतक के सैटेलाइट तस्वीरों से यह जरूर सामने आया है कि नेपाल में फ्लैश फ्लड बर्फ और चट्टानों के विशाल हिमस्खलन के कारण हुई है.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या होता है ग्लेशियर कॉलैप्स?</strong></h3>



<p>ग्लेशियर यानी पहाड़ों पर हजारों साल में जमा हुई बर्फ की विशाल परत, जो धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकती रहती है. जब तापमान बढ़ने, बर्फ पिघलने, बारिश, चट्टानों के कमजोर होने या किसी भूकंपीय हलचल जैसी वजहों से ग्लेशियर का कोई हिस्सा अस्थिर हो जाता है, तो उसका बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर सकता है. ऊंचाई से गिरते समय बर्फ अपने साथ चट्टान, मिट्टी और मलबा भी समेट लेती है, जिससे नीचे की घाटी में बेहद तेज रफ्तार वाला आइस-रॉक एवलॉन्च बन सकता है, जो भयंकर तबाही मचा सकती है.</p>



<p>इस तरह की घटना को ग्लेशियर कॉलैप्स या आइस एवलॉन्च कहा जा सकता है. नेपाल की घटना में भी टूटे हुए बर्फ के विशाल हिस्से ने चट्टानों और मिट्टी को भी अपने साथ समेट लिया. फिर तेज रफ्तार के इस फ्लैश फ्लड ने वहां भारी तबाही मचाई है. बाढ़ की वजह से 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>एक्सपर्ट्स ने ग्लेशियर कॉलैप्स और नेपाल फ्लैश फ्लड को लेकर क्या कहा?</strong></h3>



<p>सिक्किम यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग जियोलॉजी विशेषज्ञ विक्रम गुप्ता ने सैटेलाइट तस्वीरों के आंकलन के आधार पर बताया कि ग्लेशियर के निचले हिस्से का एक बड़ा भाग टूटकर गिरना घटना की शुरुआती वजह के तौर पर साफ दिख रहा है. इस दौरान ग्लेशियर के साथ बड़ी मात्रा में चट्टान बहाव में शामिल हुई.</p>



<p>वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी के अर्थ साइंटिस्ट डैन शुगर बताया कि सैटेलाइट तस्वीरों से हादसे से पहले के 24 घंटों में बर्फ के बड़े पैमाने पर पिघलने के संकेत मिले हैं. एक दिन पहले जहां कई ग्लेशियर बर्फ से ढके दिख रहे थे, अगले दिन वहां ज्यादातर खुली बर्फ दिखाई दी.</p>



<p>उन्होंने आगे बताया कि कि उनके अनुसार करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटा और लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी में जा गिरा. उनका कहना है कि इसके पीछे शुगर इलाके में निर्माण गतिविधियां भी एक संभावित कारण हो सकती हैं. साथ ही जलवायु परिवर्तन भी वजह हो सकता है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या यह GLOF भी हो सकता है?</strong></h3>



<p>नेपाल की घटना को लेकर शुरुआती जांच अभी जारी है, लेकिन उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर इसे ग्लेशियर कॉलैप्स से पैदा हुई आइस-रॉक एवलॉन्च माना जा रहा हैं. कई लोग इसे ग्लेशियर कॉलैप्स की जगह ग्लेशियर लेक ऑउटबर्स्ट फ्लड भी मान रहा है. इसमें ग्लेशियर के पास बनी झील का प्राकृतिक बांध टूटने से बड़ी मात्रा में पानी निकलता है. लेकिन अभी तक के आंकलन में इसे ग्लेशियर कोलैप्स ही माना जा रहा है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>भारत ने जारी की हेल्पलाइन नंबर</strong></h3>



<p>नेपाल में आई इस आपदा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के पीएम शाह से फोन पर बात की और उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया. नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है. काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए.</p>



<p>भारतीय दूतावास ने X पर अपने एक पोस्ट में बताया कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं. भारतीय दूतावास ने भी कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>नेपाल ने भी हॉटलाइन नंबर जारी किया</strong></h3>



<p>नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है. बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है.</p>



<p></p>
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		<title>ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात से पहले ताइवान स्ट्रेट में अमेरिकी विमान की उड़ान, चीन ने रखी पैनी नजर</title>
		<link>https://janmudda.com/trump-xi-ping-meeting/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 04:28:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशों के बीच शुक्रवार को अमेरिकी नौसेना का P-8A पोसीडॉन विमान ताइवान स्ट्रेट से गुजरा. यह विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में रहा.&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="978" height="549" src="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmuddavidesh3.png" alt="" class="wp-image-9058" srcset="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmuddavidesh3.png 978w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmuddavidesh3-300x168.png 300w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmuddavidesh3-768x431.png 768w" sizes="auto, (max-width: 978px) 100vw, 978px" /></figure>



<p>अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशों के बीच शुक्रवार को अमेरिकी नौसेना का P-8A पोसीडॉन विमान ताइवान स्ट्रेट से गुजरा. यह विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में रहा. अमेरिकी नौसेना के 7वें फ्लीट ने कहा कि इस उड़ान से अमेरिका ने एक बार फिर स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है.&nbsp;</p>



<p>अमेरिकी 7वें फ्लीट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ताइवान स्ट्रेट में काम करके अमेरिका सभी देशों के नौवहन अधिकार और स्वतंत्रता का समर्थन करता है. अमेरिका का कहना है कि उसकी सेना वहां उड़ान भरती है, समुद्र में चलती है और सैन्य गतिविधियां करती है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून इसकी इजाजत देता है.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीन ने पूरे रास्ते अमेरिकी विमान पर नजर रखी</strong></h3>



<p>चीन की सेना ने अमेरिकी P-8A पोसीडॉन विमान की इस उड़ान को ट्रैक और मॉनिटर किया. चीन के सरकारी समर्थन वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सेना ने पूरे ट्रांजिट के दौरान विमान पर नजर रखी और कहा कि स्थिति कंट्रोल में थी. अमेरिकी सैन्य जहाज और विमान हर कुछ महीनों में ताइवान स्ट्रेट से गुजरते हैं या इसके ऊपर से उड़ान भरते हैं. ताइवान स्ट्रेट ताइवान और चीन के बीच स्थित समुद्री रास्ता है. अमेरिका की ऐसी गतिविधियों से चीन नाराज होता है और वह लगातार इन मिशनों का विरोध करता रहा है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात से पहले क्यों अहम है यह उड़ान?</strong></h3>



<p>इस अमेरिकी उड़ान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने अमेरिका जाने की उम्मीद है, जहां वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं. वॉशिंगटन और बीजिंग इस समय अपने रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच ताइवान, व्यापार विवाद और तकनीक पर लगाए गए प्रतिबंधों जैसे कई मुद्दों को लेकर तनाव है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ताइवान पर अमेरिका और चीन की सोच अलग</strong></h3>



<p>चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. बीजिंग का कहना है कि ताइवान का मुद्दा उसका आंतरिक मामला है और यह उसके सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों में शामिल है. चीन इसे ऐसी लाल रेखा मानता है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए. वहीं, ताइवान की सरकार चीन के संप्रभुता के दावे को नहीं मानती. उसका कहना है कि ताइवान के भविष्य का फैसला सिर्फ वहां के लोग कर सकते हैं. अमेरिका और ताइवान ताइवान स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं. इसी वजह से अमेरिका यहां अपने जहाजों और विमानों की आवाजाही जारी रखता है.</p>



<p></p>
<p>The post <a href="https://janmudda.com/trump-xi-ping-meeting/">ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात से पहले ताइवान स्ट्रेट में अमेरिकी विमान की उड़ान, चीन ने रखी पैनी नजर</a> appeared first on <a href="https://janmudda.com">Janmudda</a>.</p>
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		<title>भारत के SIR मॉडल पर ट्रंप की नजर क्यों? मिड-टर्म से पहले बड़ा फैसला, क्या है इसके पीछे की रणनीति?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Aug 2026 04:41:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पिछले कुछ दिनों से ट्रंप लगातार भारतीय चुनावी व्यवस्था की तारीफ कर रहे हैं. पहले भारतीय चुनाव आयोग की फोटो वाली ID या फिर ये कहें कि फोटो वाली पहचान&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="982" height="546" src="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmuddavidesh2.png" alt="" class="wp-image-9044" srcset="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmuddavidesh2.png 982w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmuddavidesh2-300x167.png 300w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmuddavidesh2-768x427.png 768w" sizes="auto, (max-width: 982px) 100vw, 982px" /></figure>



<p>पिछले कुछ दिनों से ट्रंप लगातार भारतीय चुनावी व्यवस्था की तारीफ कर रहे हैं. पहले भारतीय चुनाव आयोग की फोटो वाली ID या फिर ये कहें कि फोटो वाली पहचान पसंद आई, अब वो अमेरिका में SIR लाने की वकालत कर रहे हैं. इसको लेकर उन्होंने लंबा-चौड़ा सोशल मीडिया पोस्ट किया है. इसके एक-एक शब्द के मायने आपको समझाएंगे. आखिर ट्रंप की मजबूरी क्या है? आखिर ट्रंप चाहते क्या हैं? 4 प्वाइंट में समझिए अमेरिका में भारत जैसा SIR क्यों ट्रेंड हो रहा है?&nbsp;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>सवाल है ट्रंप भारत की तरह अमेरिका में भी वोटर लिस्ट का ‘शुद्धीकरण’ क्यों चाहते हैं?</li>



<li>ये भी पूछा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप को भारत जैसा SIR क्यों चाहिए?</li>



<li>अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव से पहले SIR वाली तैयारी क्यों हो रही है?</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अमेरिका में भी भारत की तरह SIR होगा?</strong></h3>



<p>अमेरिका में वोटर लिस्ट की शुद्धता वाली बहस तेज हो चुकी है. जगह-जगह इसकी चर्चा हो रही है. इसको लेकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. पूरी दुनिया में अब बहस इस विषय पर हो रही है कि क्या अमेरिका में भी भारत की तरह SIR होगा? क्या अमेरिका भी वोटिंग प्रक्रिया को SIR से शुद्ध और सत्यापित करेगा? इसे ट्रंप के नए सोशल मीडिया पोस्ट से डिटेल में समझिए कि आखिर ट्रंप की चिंता क्या है? डर क्या है? बेचैनी की असल वजह क्या है?</p>



<p>ट्रंप का दावा है कि अमेरिका में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 24000 से ज्यादा गैर-नागरिक मतदाता मिले. ट्रंप का तर्क रहा है कि गैर-नागरिक मतदाता मुख्य रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देते हैं, जिससे रिपब्लिकन पार्टी और उनकी नीतियां प्रभावित होती हैं. अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिड टर्म चुनाव होना है. इससे ट्रंप की बेचैनी को समझा जा सकता है.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>12 करोड़ 80 लाख मतदाताओं का विश्लेषण</strong></h3>



<p>ट्रंप ने अपने दावे को आंकड़े के जरिए पेश किया है. सोशल मीडिया पोस्ट में ये लिखा कि वर्ष 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड का मिलान किया गया है. इसमें 12 करोड़ 80 लाख मतदाताओं का शुरुआती विश्लेषण किया गया, जिसमें 24000 गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान की गई है. इतना ही नहीं ट्रंप ने ये भी संकेत दिए हैं कि बचे हुए 3 करोड़ 20 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी.</p>



<p>ट्रंप का दावा है इस जांच के बाद अमेरिका में गैर-नागरिक मतदाताओं की संख्या बढ़ सकती है. ट्रंप इस पूरे मसले को अमेरिका के हित से जोड़ रहे हैं. उनका कहना है हर हाल में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करना होगा. ट्रंप ने वर्ष 2020 के अमेरिकी चुनाव का जिक्र करते हुए भी कई चौंकाने वाले दावे किए. ट्रंप का कहना है अगर 2020 में अवैध वोटों और गड़बड़ियों को हटाया जाता, तो चुनाव जीत जाते है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अमेरिका में SIR कैसे बना बड़ा मुद्दा?</strong></h3>



<p>खैर ट्रंप के दावों में कितना दम है ये अलग विषय है लेकिन अमेरिका में भारत जैसा SIR की चर्चा खूब हो रही है. वो शब्द ट्रेंड हो रहे हैं जो भारत में भी कई चुनावों से पहले SIR प्रक्रिया के दौरान चर्चा में थे. इन्हीं शब्दों के आधार पर हमने सत्ता का एक शब्दकोष तैयार किया है, जिससे आप समझ सकते हैं कैसे अमेरिका में भी SIR बड़ा विषय बन गया है.</p>



<p>ये शब्द हैं फर्जी वोटर, जिसका जिक्र ट्रंप ने भी किया है. ट्रंप ने ये भी कहा है कि नए कानून से व्यवस्था को दुरुस्त करेंगे. भारत में भी वोट चोरी वाले आरोप लगे थे. ट्रंप भी वोट में गड़बड़ी के दावे कर रहे हैं. इसके अलावा वोटों के शुद्धीकरण पर ट्रंप ने भी जोर दिया है. वोटों के सत्यापन पर भी ट्रंप का फोकस है. कई देशों से अमेरिका में घुसपैठ वाले दावे भी हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ट्रंप अब नया एक्ट लाने की बात कर रहे</strong></h3>



<p>चुनाव के समय भी रहे हैं, जिसको लेकर ट्रंप अब नया एक्ट लाने की बात कर रहे हैं. ट्रंप के शब्दकोष की बात करें तो उनके दिमाग भी कई शब्द हैं जैसे भारत जैसे SIR की बात को कर रहे हैं. भारत जैसे फोटो ID कार्ड का जिक्र पहले ही कर चुके हैं. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर पहले ही वो भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ कर चुके हैं.</p>



<p>ट्रंप की बेचैनी को कुछ आंकड़ों से भी समझते हैं. व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक आंकड़े के अनुसार, अमेरिका में मेक्सिकन मूल के बड़ी संख्या में गैर नागरिक वोटर हैं. इनकी संख्या लगभग 3800 है. वहीं कनाडाई मूल के 950 हैं. मतलब ऐसे गैर नागरिक वोटर जिनका जन्म कनाडा में हुआ है लेकिन वो अमेरिका में भी वोटिंग करते हैं.</p>



<p>फिलिपींस और जमैका मूल के 900 वोटर हैं, जर्मन मूल के 700, ब्रिटिश मूल के 650, क्यूबन मूल के 450, वियतनामी मूल के 400, हैती मूल के 400 और दक्षिण कोरियाई मूल के 350 वोटर हैं. ट्रंप के दावे के अनुसार, इसके अलावा भी 14500 वोटर हैं, जिनका जन्म दूसरे देशों में हुआ है लेकिन अमेरिका में उन्हें वोटिंग का अधिकार है वो वोट करते हैं.</p>



<p></p>
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		<title>ईरान के मिसाइल हमले के बाद UAE का बड़ा फैसला, तेहरान से सभी व्यापारिक रिश्ते किए खत्म</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:15:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ सभी व्यापार, कारोबारी लेनदेन और वित्तीय लेनदेन अगले आदेश तक रोक दिए हैं. UAE का यह फैसला ईरान से जुड़े एक नए&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="979" height="540" src="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmudda2-5.png" alt="" class="wp-image-9035" srcset="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmudda2-5.png 979w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmudda2-5-300x165.png 300w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmudda2-5-768x424.png 768w" sizes="auto, (max-width: 979px) 100vw, 979px" /></figure>



<p>संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ सभी व्यापार, कारोबारी लेनदेन और वित्तीय लेनदेन अगले आदेश तक रोक दिए हैं. UAE का यह फैसला ईरान से जुड़े एक नए मिसाइल विवाद के बाद आया है. इससे दोनों देशों के बीच हाल में सुधर रहे रिश्तों को बड़ा झटका लगा है. UAE के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मंगलवार को उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया. ये मिसाइलें UAE की तरफ आ रही थीं. इसके बाद UAE के लोगों के मोबाइल फोन पर कुछ समय के लिए मिसाइल खतरे का अलर्ट भेजा गया.&nbsp;</p>



<p>UAE का कहना है कि उसकी जांच में पता चला कि दोनों मिसाइलें समुद्री जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागी गई थीं. एक मिसाइल UAE के क्षेत्रीय जल से बाहर समुद्र में गिरी, जबकि दूसरी UAE के क्षेत्रीय जल में गिरी. UAE के मुताबिक, इस घटना में कोई नुकसान या किसी के घायल होने की खबर नहीं है. हालांकि, ईरान ने मिसाइल दागने से इनकार किया है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने UAE के आरोपों को बेबुनियाद बताया और क्षेत्र के देशों से ऐसे आरोप लगाने से बचने को कहा.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>UAE ने आर्थिक रिश्ते क्यों तोड़े?</strong></h3>



<p>मिसाइल घटना के बाद UAE के विदेश मंत्रालय ने ईरान के खिलाफ बड़ा आर्थिक कदम उठाया. मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हमेली ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है. इसी वजह से ईरान के साथ सभी व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेनदेन रोक दिए गए हैं. यह रोक कब तक रहेगी, इसकी कोई तारीख नहीं बताई गई है.</p>



<p>यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ समय में UAE और ईरान के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा था. दोनों देशों के बीच कुछ व्यापारिक गतिविधियां फिर शुरू हुई थीं और कुछ ईरानी उड़ानें भी UAE लौटने लगी थीं. दुबई में कारोबार सामान्य होने लगा था. युद्ध शुरू होने के समय UAE से बाहर रह गए करीब 20 हजार ईरानी नागरिकों को भी वापस आने की अनुमति दी गई थी.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>होर्मुज में पहले से बढ़ा हुआ तनाव</strong></h3>



<p>इस घटना का असर होर्मुज स्ट्रेट पर भी पड़ सकता है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और LNG रास्तों में से एक है. युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरता था. लेकिन युद्ध और होर्मुज में जारी तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है. पिछले दिनों UAE ने ईरान पर अपनी सरकारी तेल कंपनी ADNOC से जुड़े जहाजों पर हमले का भी आरोप लगाया था. इन घटनाओं में किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी.</p>



<p></p>
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		<title>गाजा को लेकर बेन-ग्वीर का भड़काऊ बयान, ‘वे इंसान नहीं, हर रात 30-40 को मारो’</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 08:23:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मध्य पूर्व की गाजा पट्टी में संघर्षपूर्ण स्थिति बनी हुई है. शांति समझौते की कोशिशों के बीच भी संघर्ष जारी है. इस बीच इजराइल के कट्टरपंथी नेता और नेशनल सिक्योरिटी&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="982" height="549" src="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmudda2-4.png" alt="" class="wp-image-9019" srcset="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmudda2-4.png 982w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmudda2-4-300x168.png 300w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/08/janmudda2-4-768x429.png 768w" sizes="auto, (max-width: 982px) 100vw, 982px" /></figure>



<p>मध्य पूर्व की गाजा पट्टी में संघर्षपूर्ण स्थिति बनी हुई है. शांति समझौते की कोशिशों के बीच भी संघर्ष जारी है. इस बीच इजराइल के कट्टरपंथी नेता और नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन-ग्विर ने भड़काऊ बयान देते हुए कहा है कि इजराइली सेना को हर रात गाजा में “30 से 40” लोगों का कत्ल कर देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि उस इलाके में रहने वाले फिलिस्तीनी लोग “इंसान भी नहीं हैं”.&nbsp;</p>



<p>बेन-ग्विर, जो बैंजामिन नेतन्याहू की गठबंधन वाली सरकार के सबसे कट्टरपंथी नेताओं में से एक हैं, ने यह बात गाजा में बंधक रहे रोम ब्रास्लाव्स्की (Rom Braslavski) के साथ एक पॉडकास्ट में कही.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>‘गाजा में हर रात टारगेटेड किलिंग, 30-40 को मारें’</strong></h3>



<p>मंत्री बेन-ग्विर ने कहा, “मुझे लगता है कि गाजा में हर रात टारगेटेड किलिंग होनी चाहिए और रोजाना 30 से 40 लोगों को मार दिया जाना चाहिए.” उन्होंने यह भी कहा कि हत्याएं सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं होनी चाहिए जिनसे तुरंत खतरा हो.</p>



<p>फिलिस्तनियों के समूल नाश की बात करते हुए इजराइली मंत्री ने कहा, “सिर्फ वे लोग नहीं जिनसे अभी खतरा है. ये ऐसे लोग हैं जिन्हें जिंदा ही नहीं रहना चाहिए. उन्हें इंसान <strong>पूरे गाजा क्षेत्र में बसाई जाए इजराइली बस्तीः ग्विर</strong></p>



<p>बेन-ग्विर यहीं नहीं रुके. उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि इजराइल पूरे गाजा क्षेत्र में बस्तियां बसाए. जिससे फिलिस्तीनी लोगों को यह इलाका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ जाए. उन्होंने कहा, “मैं पूरे गाजा को अपना मानता हूं.” उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि फिलिस्तीनी अधिक से अधिक संख्या में वहां से चले जाएं ताकि पूरे इलाके में इजराइली बस्तियां बसाई जा सकें.</p>



<p>इजराइली मंत्री बेन-ग्विर ने आगे कहा, “सिर्फ गुश कातिफ में ही नहीं, बल्कि पूरे गाजा में हमारी बस्तियां हों, अधिक से अधिक लोगों को वहां से जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें उनके देशों में भेजा जाए. और रही बात आतंकवादियों की, उनके लिए कोई पलायन नहीं, कुछ नहीं, बस उन्हें एक-एक करके मार दिया जाए.”</p>



<p>कहकर मैं उनकी तारीफ ही कर रहा हूं.”</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>गाजा को लेकर PM नेतन्याहू के साथ बातचीत जारी</strong></h3>



<p>कट्टरपंथी नेता बेन-ग्विर की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब सोमवार को अमेरिका के मध्य पूर्व दूत जेरेड कुशनर ने इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ कई घंटों तक बैठक की. यह बैठक नेतन्याहू द्वारा गाजा में जारी जंग को खत्म करने के अमेरिकी प्लान के नए हिस्से को सार्वजनिक रूप से खारिज करने के कुछ दिनों बाद हुई.</p>



<p>इस प्रस्ताव के तहत, हमास अपने हथियार रख देगा और इजराइल गाजा पट्टी के बड़े हिस्से से चरणबद्ध तरीके से अपनी सेना हटा लेगा. बैठक की जानकारी रखने वाले एक इजराइली अधिकारी के अनुसार, नेतन्याहू और कुशनर इस बात पर राजी हो गए कि एक अमेरिकी जनरल हमास के हथियार छोड़ने की प्रक्रिया की निगरानी करेगा, जबकि नेतन्याहू ने जोर दिया कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इजराइल गाजा से अपनी सेना नहीं हटाएगा.</p>



<p>एक वरिष्ठ इजराइली अधिकारी ने समाचार एजेंसी AFP को बताया कि दोनों पक्ष “इस बात पर राजी हो गए हैं कि जब तक पूरे गाजा में हमास के हथियार नहीं छीन लिए जाते, तब तक गाज में सेना की दोबारा तैनाती या पुनर्निर्माण नहीं होगा.” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और नेतन्याहू के पुराने पारिवारिक दोस्त कुशनर ने मिस्र में हमास के साथ दुर्लभ सीधी बातचीत के एक दिन बाद यरूशलेम में इजरायली नेता से मुलाकात की. हमास ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका समर्थित योजना के प्रति अपनी रजामंदी जताई है.</p>
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		<title>अगले साल भारत दौरे पर आएंगे डोनाल्ड ट्रंप, मार्को रूबियो बोले- ट्रेड डील जल्द होगी फाइनल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 07:54:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल (2027) की शुरुआत में भारत दौरे पर आएंगे. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ये जानकारी दी. उन्होंने कहा, ट्रंप अगले साल की&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="984" height="515" src="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/06/janmudda1-17.png" alt="" class="wp-image-8746" srcset="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/06/janmudda1-17.png 984w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/06/janmudda1-17-300x157.png 300w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/06/janmudda1-17-768x402.png 768w" sizes="auto, (max-width: 984px) 100vw, 984px" /></figure>



<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल (2027) की शुरुआत में भारत दौरे पर आएंगे. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ये जानकारी दी. उन्होंने कहा, ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे. मैं राष्ट्रपति के दौरे को अंतिम रूप देने के लिए भारत जा रहा हूं.&nbsp;</p>



<p>रूबियो ने कहा, ट्रंप और मोदी के संबंध अच्छे हैं. भारत अमेरिका और वेनेजुएला से बातचीत कर रहा है. हम सप्लाई बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. रूबियो ने ये भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील जल्द ही फाइनल होने वाली है.&nbsp;</p>



<p>अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है, जिनमें भारी कच्चे तेल को रिफ़ाइन करने की क्षमता है. ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी के प्रशंसक है. पीएम मोदी ने भारत को एक वैश्विक शक्ति बनाया है.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सर्जियो गोर क्या बोले?</strong></h3>



<p>भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के करीब हैं और अब बस कुछ ही मुद्दों को सुलझाना बाकी है. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका असीम संभावनाओं वाले स्वाभाविक साझेदार हैं. गोर ने आगे कहा कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच करीबी व्यक्तिगत संबंध भारत-अमेरिका रिश्तों की नींव हैं और दोनों नेता एक जैसा सोचते हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आखिरी बार कब भारत आए थे ट्रंप?</strong></h3>



<p>ट्रंप ने पिछली बार फरवरी 2020 में भारत का दौरा किया था, जब वे अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ शामिल हुए थे. ट्रंप और पीएम मोदी लगातार संपर्क में रहे हैं. हाल ही में दोनों नेताओं की मुलाकात फ्रांस में जी-7 समिट के दौरान हुई थी.</p>



<p>पीएम मोदी के साथ मुलाकात में ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर सहमत होने के करीब हैं. पिछले साल ट्रंप के भारत पर टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया था.</p>



<p>हाल ही में अमेरिकी सेना द्वारा तीन भारतीय नाविकों की हत्या ने रिश्तों को और मुश्किल बना दिया. ये नाविक ओमान की खाड़ी में एक हमले में मारे गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G7 समिट में ट्रंप के साथ हुई अपनी मुलाकात में होर्मुज में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था.</p>



<p>दोनों नेताओं ने ट्रेड डील पर भी बातचीत की. पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने मोदी को सख़्त बातचीत करने वाला बताया और जल्द ही भारत का दौरा करने का वादा किया. अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि अगर भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका उसकी मदद करेगा. मोदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई उस व्यक्ति पर हमला करता है, तो हम वहां मौजूद रहेंगे, लेकिन अगर कोई नया नेता आता है, तो मुझे इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता. पिछले साल फरवरी में पीएम मोदी अमेरिका दौरे पर गए थे. उन्होंने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी. तब से उनके बीच कई बार फ़ोन पर बातचीत हुई, लेकिन मुलाकात लंबे समय के बाद फ्रांस में हुई.</p>



<p></p>
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		<title>पाकिस्तान में मचा बवाल, विदेश मंत्री इशाक डार पर परमाणु राज लीक करने के आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 11:19:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार पर ईरान से परमाणु जानकारी लेकर अमेरिका को देने का आरोप लगा है. सीआईए के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन के खुफिया सूत्रों के हवाले&#8230; </p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="983" height="551" src="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/06/pak.png" alt="" class="wp-image-8587" srcset="https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/06/pak.png 983w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/06/pak-300x168.png 300w, https://janmudda.com/wp-content/uploads/2026/06/pak-768x430.png 768w" sizes="auto, (max-width: 983px) 100vw, 983px" /></figure>



<p>पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार पर ईरान से परमाणु जानकारी लेकर अमेरिका को देने का आरोप लगा है. सीआईए के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन के खुफिया सूत्रों के हवाले से यह दावा किया था, जिस पर अमेरिकी कांग्रेस में भी चर्चा की गई थी. डार पर आरोप है कि उन्होंने पिछले हफ्ते रुबियो से मुलाकात में उन्हें ईरान परमाणु कार्यक्रम के बारे में कुछ नई जानकारी बताई, जिसे सुनकर रुबियो हतप्रभ रह गए.&nbsp;</p>



<p>हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे खारिज किया है. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि डार ने रुबियो से मुलाकात के दौरान ईरान परमाणु कार्यक्रम पर कोई बात नहीं की.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अमेरिकी कांग्रेस में हुई इसकी चर्चा</strong></h3>



<p>लैरी जॉनसन ने दावा करते हुए कहा था कि डार जब रुबियो से मिले, तब उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री को ईरान के परमाणु कार्यक्रम संबंधी इरादों के बारे में जानकारी दी थी. डार का कहना था कि अगर ईरान से जल्द समझौता नहीं होता है, तो ईरान परमाणु हथियार बना सकता है.</p>



<p>अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था के मुताबिक ईरान के पास 440 किलो यूरेनियम है, जो 60 प्रतिशत तक संवर्धित है. इसे 90 प्रतिशत तक संवर्धित करने पर आसानी से परमाणु हथियार बनाया जा सकता है.</p>



<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक ईरान के पास परमाणु हथियार आने से इजराइल का अस्तित्व खत्म हो जाएगा. क्योंकि, ईरान सबसे पहले इजराइल पर ही हमला करेगा.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पहले रुबियो फिर पाक ने खारिज किया</strong></h3>



<p>2 जून को अमेरिकी कांग्रेस में जब रुबियो पेश हुए तो उनसे सांसद स्कॉर पेरी ने यह सवाल पूछा. इस पर रुबियो ने कहा कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है. मैंने इस बारे में कुछ नहीं सुना है. मुझे इतना पता है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता है.</p>



<p>इसके 2 दिन बाद यानी 4 जून को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि डार और रुबियो की मुलाकात में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई बात नहीं हुई. वहीं ईरान ने पूरे मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है.</p>



<p></p>
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		<title>क्या दुनिया फिर होगी अशांत? अमेरिका ने बनाई नई जंग की रणनीति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jan Mudda]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 May 2026 10:00:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन पिछले कई महीनों से क्यूबा पर हमला करने के लिए हथियार और सैनिकों की तैनाती कर रहा है. अगर अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://janmudda.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82/">क्या दुनिया फिर होगी अशांत? अमेरिका ने बनाई नई जंग की रणनीति</a> appeared first on <a href="https://janmudda.com">Janmudda</a>.</p>
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<h2 class="wp-block-heading">रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन पिछले कई महीनों से क्यूबा पर हमला करने के लिए हथियार और सैनिकों की तैनाती कर रहा है. अगर अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंजूरी देते है तो पेंटागन क्यूबा पर हमला बोल देगा. अमेरिका की तरफ से इस साल का तीसरा हमला होगा.</h2>



<p>अमेरिका एक और युद्ध में कूदने की तैयारी कर रहा है. पॉलिटिको के मुताबिक पेंटागन ने क्यूबा में ऑपरेशन को लेकर प्लान तैयार कर लिया है. प्लान को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा गया है. ट्रंप अगर इस प्लान को मंजूर करते हैं तो क्यूबा और <a href="https://janmudda.com/"><strong>अमेरिका</strong> </a>के बीच जंग की शुरुआत हो सकती है. इस साल यानी 2026 में अब तक अमेरिका पहले ही 2 देशों पर हमला कर चुका है.&nbsp;</p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन को पहले यह उम्मीद थी कि आर्थिक प्रतिबंध के बाद अपने आप ही क्यूबा में तख्तापलट हो जाएगा, लेकिन आर्थिक और राजनीतिक दबाव के बाद भी अमेरिका क्यूबा में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को हिला नहीं पाया इसलिए अब ट्रंप प्रशासन सैन्य कारवाई पर विचार कर रहा है. पिछले कई समय से अमेरिका ने कैरिबियन जलक्षेत्र में अपनी सेना की मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है.&nbsp;</p>



<p>इसी कवायद के तहत मई में USS निमित्ज एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन पहुंचा, जिसके साथ कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और क्रूजर भी तैनात किए गए हैं. ये जहाज जमीन पर सटीक मिसाइल हमले करने में सक्षम हैं. इसके अलावा अमेरिकी ड्रोन और निगरानी विमान कई महीनों से क्यूबा के आसपास सक्रिय बताए जा रहे हैं.&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्यूबा पर हमला करना क्यों चाहता है अमेरिका?</strong></h3>



<p>बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कैबिनेट मीटिंग के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियों ने चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका के पास में ही एक अस्थिर देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. रुबियों ने बताया कि क्यूबा अस्थिरता है और वहां काफी मुश्किलें हैं.</p>



<p>कुछ दिनों से क्यूबा में चीन की दखल लगातार बढ़ रही है. चीन ने क्यूबा के साथ कई डील की है. दूसरी ओर वेनेजुएला पर कंट्रोल के बाद अमेरिका की कोशिश क्यूबा पर कब्जे की है. इसी मिशन के तहत क्यूबा पर हमले की तैयारी की जा रही है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अब क्यूबा की सैन्य ताकत को भी जान लीजिए</strong></h3>



<p>क्यूबा की सबसे बड़ी ताकत उसकी War of All the People (सभी लोगों का युद्ध) पॉलिसी है. इसका मतलब है कि अगर देश पर हमला होता है तो सिर्फ सेना ही नहीं, बल्कि आम नागरिक, मिलिशिया और पैरामिलिट्री बल भी लड़ाई में शामिल होंगे.</p>



<p>सेना की बात की जाए तो इस वक्त क्यूबा के पास करीब 50 हजार एक्टिव सैनिक, 39 हजार रिजर्व सैनिक और लगभग 90 हजार पैरामिलिट्री सदस्य हैं. क्यूबा की सरकार ने ईरान की तरह सेना को अलग-अलग खांचों में बांट रखा है. युद्ध की स्थिति में सेना की टुकड़ी खुद फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है.</p>



<p>क्यूबा को गुरिल्ला लड़ाई में माहिर माना जाता है. 1970 के आसपास क्यूबा ने गोरिल्ला वॉर के जरिए ही अमेरिका को घुटनों पर ला दिया था.</p>
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