ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात से पहले ताइवान स्ट्रेट में अमेरिकी विमान की उड़ान, चीन ने रखी पैनी नजर

अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशों के बीच शुक्रवार को अमेरिकी नौसेना का P-8A पोसीडॉन विमान ताइवान स्ट्रेट से गुजरा. यह विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में रहा. अमेरिकी नौसेना के 7वें फ्लीट ने कहा कि इस उड़ान से अमेरिका ने एक बार फिर स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है. 

अमेरिकी 7वें फ्लीट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ताइवान स्ट्रेट में काम करके अमेरिका सभी देशों के नौवहन अधिकार और स्वतंत्रता का समर्थन करता है. अमेरिका का कहना है कि उसकी सेना वहां उड़ान भरती है, समुद्र में चलती है और सैन्य गतिविधियां करती है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून इसकी इजाजत देता है. 

चीन ने पूरे रास्ते अमेरिकी विमान पर नजर रखी

चीन की सेना ने अमेरिकी P-8A पोसीडॉन विमान की इस उड़ान को ट्रैक और मॉनिटर किया. चीन के सरकारी समर्थन वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सेना ने पूरे ट्रांजिट के दौरान विमान पर नजर रखी और कहा कि स्थिति कंट्रोल में थी. अमेरिकी सैन्य जहाज और विमान हर कुछ महीनों में ताइवान स्ट्रेट से गुजरते हैं या इसके ऊपर से उड़ान भरते हैं. ताइवान स्ट्रेट ताइवान और चीन के बीच स्थित समुद्री रास्ता है. अमेरिका की ऐसी गतिविधियों से चीन नाराज होता है और वह लगातार इन मिशनों का विरोध करता रहा है.

ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात से पहले क्यों अहम है यह उड़ान?

इस अमेरिकी उड़ान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने अमेरिका जाने की उम्मीद है, जहां वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं. वॉशिंगटन और बीजिंग इस समय अपने रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच ताइवान, व्यापार विवाद और तकनीक पर लगाए गए प्रतिबंधों जैसे कई मुद्दों को लेकर तनाव है.

ताइवान पर अमेरिका और चीन की सोच अलग

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. बीजिंग का कहना है कि ताइवान का मुद्दा उसका आंतरिक मामला है और यह उसके सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों में शामिल है. चीन इसे ऐसी लाल रेखा मानता है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए. वहीं, ताइवान की सरकार चीन के संप्रभुता के दावे को नहीं मानती. उसका कहना है कि ताइवान के भविष्य का फैसला सिर्फ वहां के लोग कर सकते हैं. अमेरिका और ताइवान ताइवान स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं. इसी वजह से अमेरिका यहां अपने जहाजों और विमानों की आवाजाही जारी रखता है.

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