सोनम वांगचुक के समर्थन में संजय सिंह का केंद्र पर वार, बोले- ’20 जुलाई के संसद कूच से सरकार डरी हुई है

आम आदमी पार्टी ने 21 दिनों से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षाविद सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराने और युवाओं पर लाठीचार्ज करने की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है. आप के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि मोदी सरकार सोनम वांगचुक के संसद तक शांतिपूर्ण कूच के आह्वान से डर गई है. इसलिए सुबह-सुबह जनता मंतर पर पुलिस को भेज कर युवाओं पर लाठीचार्ज कराया और सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती करा दिया, ताकि इस आंदोलन को कुचला जा सके. 

संजय सिंह ने कहा कि 59 साल के सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे और अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर देश के उन करोड़ों युवाओं की आवाज उठा रहे थे जो 93 पेपर लीक से बर्बाद हो चुके थे. वे युवा बेबस थे और उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं था. भारत के प्रधानमंत्री ने 21 दिन तक उनसे बात नहीं की और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए एक ट्वीट करना भी जरूरी नहीं समझा. सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने के लिए नहीं आया कि आखिर वे क्यों अपनी जान देने पर आमादा हैं? 

पुलिस बल ने अचानक जंतर-मंतर को घेरा-संजय सिंह

संजय सिंह ने कहा कि अचानक पुलिस बल ने वहां पहुंचकर जंतर-मंतर को घेर लिया और नौजवानों के ऊपर लाठी चलाकर सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया है. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने 20 जुलाई के लिए देश की जनता, युवाओं, सांसदों और विधायकों का आह्वान किया था कि 20 जुलाई को हम लोग जंतर-मंतर से संसद की तरफ शांतिपूर्ण मार्च करेंगे जहां से संसद का सत्र शुरू होने वाला है.

सत्ता का इतना अहंकार अच्छा नहीं-संजय सिंह

संजय सिंह ने कहा कि मैं मोदी जी से कहना चाहता हूं कि सत्ता का इतना अहंकार अच्छा नहीं है कि हर व्यक्ति पर लाठी चलाओ, हर व्यक्ति पर गोली चलाओ और हर व्यक्ति पर आंसू गैस के गोले छोड़ो. कभी किसान आंदोलन को कुचलो, कभी नौजवानों के आंदोलन को कुचलो और कभी माताओं-बहनों के आंदोलन को कुचलो, यह अच्छी राजनीति नहीं है.

संजय सिंह ने कहा कि सत्ता का यह अहंकार यही नौजवान खत्म करेगा और जिसके ऊपर आज लाठियां बजाई जा रही हैं, वही इस सत्ता को उखाड़ कर फेंकेगा. इसलिए मैं देश के युवाओं से अपील करना चाहता हूं कि सोनम वांगचुक का साथ दीजिए और अपने आंदोलन को कमजोर ना पड़ने दीजिए.

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