
विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद तृणमूल विधायक दल टूट चुका है. संसदीय पार्टी टूट की कगार पर है. बागी सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावत का ऐलान कर दिया और 20 सांसदों ने पत्र लिखकर लोकसभा स्पीकर से अलग गुट बनाने का दावा किया है. लोकसभा और विधानसभा के बाद तृणमूल कांग्रेस शासित नगरपालिकाओं पर भी तलवार लटकी है. जिन नगर पालिकाओं में तृणमूल का कब्जा था, वे भी टूटने लगीं. कई नगर निगम बोर्ड टूटने लगे.
पूरे राज्य में एक के बाद एक पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया. कोलकाता नगर निगम में भी उथल-पुथल वाली स्थिति पैदा हो गई. फिरहाद हकीम ने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफ़ के बाद से नगर निगम बोर्ड के टूटने की आशंका है. इस बीच, जब से बीजेपी सत्ता में आई है, उसने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. एक के बाद एक टीएमसी पार्षदों को गिरफ्तार किया जा रहा है.
रंगदारी और कटमनी के आरोप में फंसे पार्षद
हाल ही में, तृणमूल पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता पुलिस के जाल में फंस गए. बप्पादित्य दासगुप्ता कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 101 के पार्षद थे. उन पर पाटुली के झिलपार इलाके की एक दुकान से रंगदारी मांगने का आरोप है. इस मामले में पुलिस ने कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कुल 7 तृणमूल पार्षदों को कई आरोपों में गिरफ्तार किया है.
देखें कि अब तक गिरफ्तार पार्षदों की लिस्ट में कौन-कौन शामिल हैं.
- सुदीप पाल: पार्षद, वार्ड नंबर 123. बोरो 16 चेयरमैन, बारिशा, बेहाला.
- अरिजीत दास ठाकुर: वार्ड नंबर 106, पार्षद, गरफा.
- सचिन सिंह: पार्षद, वार्ड नंबर 36, सियालदह.
- महेश कुमार शर्मा: पार्षद, वार्ड नंबर 42, बड़ा बाजार.
- बप्पादित्य दासगुप्ता: वार्ड नंबर 101, पाटुली, तृणमूल कांग्रेस पार्टी के मुख्य संयोजक, कोलकाता नगर निगम.
- बिस्वजीत मंडल: वार्ड नंबर 114, ईस्ट पुटियारी, कुंदघाट, को बेल मिल गई है.
- मोहम्मद जसीमुद्दीन: वार्ड नंबर 39, कालूटोला, जोरासांको.
कई पार्षदों के खिलाफ जांच
इसके अलावा, वार्ड नंबर 108 के तृणमूल पार्षद और बोरो नंबर 12 के चेयरमैन सुशांत कुमार घोष फरार हैं. पुलिस उनकी तलाश कर रही है. बता दें कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद लगातार टीएमसी नेताओं के खिलाफ बगावत शुरू हुई है. पार्टी में उनके खिलाफ आवाज उठी है और उन पर अलग-अलग आरोप लगाए गये हैं. आरोपों में कटमनी से लेकर रंगदारी के आरोप शामिल हैं और इन आरापों के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया है.
फिरहाद हकीम भी क्या बदलेंगे पाला?
क्या फिरहाद हकीम इस बार ममता बनर्जी का साथ छोड़ रहे हैं? फिरहाद सोमवार को विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के कार्यालय पहुंचे, जिससे अटकलें और बढ़ गईं. उन्हें तृणमूल से निकाले गए विधायक संदीपन साहा विधानसभा में विपक्ष के नेता के घर ले गए.
विधानसभा में तृणमूल विधायक के दो हिस्सों में बंटने के बाद से ही फिरहाद को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. फिरहाद तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के लंबे समय से साथी हैं. जब ममता कांग्रेस में थीं, तब भी वह उनके साथ थे. फिर वह शुरू से ही तृणमूल में रहे हैं. तृणमूल के समय में फिरहाद अहम विभागों में मंत्री रहे हैं. वह कोलकाता के मेयर भी रह चुके हैं.
फिरहाद ने तीन दिन पहले कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया था. उस समय पता चला था कि उन्होंने ममता की इजाजत से मेयर पद से इस्तीफा दिया है. फिर वह नबान्न में मुख्यमंत्री के बुलावे पर कोलकाता पोर्ट के विधायक के तौर पर मौजूद थे. जब तृणमूल सुप्रीमो ममता ने बंगाल में BJP की जीत से इनकार किया, तो नबन्ना में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बुलाई मीटिंग में फिरहाद के होने को लेकर तरह-तरह के कयास लगने लगे और अब इस्तीफा देने के बाद उनकी ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद अटकलें तेज हो गयी हैं.