
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में जारी किए गए साझा घोषणापत्र (नई दिल्ली घोषणापत्र) में सदस्य देशों ने क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. इस मंच पर वैश्विक व्यवस्था में संतुलन बनाने और एकतरफा कार्रवाइयों का विरोध करने के लिए मजबूत आवाज उठाई गई है.
BRICS देशों ने क्यूबा पर लगाए जा रहे एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई है. BRICS का कहना है कि इन प्रतिबंधों का क्यूबा की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और आम लोगों पर गंभीर मानवीय असर पड़ रहा है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता
घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव A/RES/80/4 के अनुरूप क्यूबा पर लगाए गए आर्थिक, व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंधों को खत्म करने की जरूरत बताई गई है. वहीं BRICS देशों ने मिडिल ईस्ट/पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर भी गहरी चिंता जताई है. सदस्य देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की है, जो हालात को और खराब कर सकते हैं.
देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान
BRICS ने नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है. साथ ही देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही गई है. घोषणा-पत्र में कहा गया है कि संवाद और कूटनीति के जरिए लंबे समय का समाधान तलाशने की कोशिश तेज की जानी चाहिए, ताकि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता कायम हो सके. BRICS ने वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा की सुचारू आवाजाही बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया है.