सागर में बड़ी लापरवाही! इयरफोन लगाकर बात करती रही नर्स, मरीज को लगा दिया बेहोशी का इंजेक्शन, हुई मौत

मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है. यहां कथित लापरवाही के चलते एक मरीज की मौत हो गई. आरोप है कि ड्यूटी के दौरान मोबाइल पर बात करने में व्यस्त नर्स ने मरीज को गलत इंजेक्शन लगा दिया. इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है, वहीं मृतक के परिवार ने पूरे मामले की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. 

मृतक की पहचान ईएनटी विभाग में भर्ती देवेंद्र पाठक के रूप में हुई है. परिवार का आरोप है कि एक छोटी सी लापरवाही ने उनके परिवार के मुखिया की जान ले ली. देवेंद्र पाठक की पत्नी रीता पाठक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि जब नर्स मरीज को इंजेक्शन लगा रही थी, उस दौरान उसके कानों में ब्लूटूथ इयरफोन लगे हुए थे और वह फोन पर बातचीत कर रही थी. 

नर्स को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया

परिजनों का कहना है कि उन्होंने नर्स को मोबाइल पर बात करने से रोका भी था, लेकिन वह नहीं मानी. आरोप है कि इसी दौरान नर्स ने वह इंजेक्शन मरीज को लगा दिया, जिसे अगले दिन ऑपरेशन प्रक्रिया के दौरान बेहोशी के लिए इस्तेमाल किया जाना था. 12 जून को देवेंद्र पाठक को गले में गांठ की जांच और बायोप्सी के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने आगे की प्रक्रिया के लिए एट्राक्यूरियम बेसीलेट (Atracurium Besylate) इंजेक्शन मंगवाया था. यह एक हाई रिस्क दवा मानी जाती है, जिसका इस्तेमाल मांसपेशियों को शिथिल करने के लिए किया जाता है और इसे आमतौर पर एनेस्थीसिया प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों की निगरानी में दिया जाता है.

परिवार का आरोप है कि इस दवा को बिना डॉक्टर की अनुमति और बिना किसी डबल चेकिंग प्रक्रिया के वार्ड में ही मरीज को लगा दिया गया. इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद देवेंद्र पाठक की तबीयत बिगड़ने लगी. उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई और उनकी स्थिति गंभीर हो गई. डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया और करीब 45 मिनट तक सीपीआर देने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर लिया गया. 

मरीज की दर्दनाक मौत

इसके बाद देवेंद्र पाठक करीब 11 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन 23 जून की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया. मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआती जांच के आधार पर नर्स शिखा पटले को निलंबित कर दिया है. वहीं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसे केवल एक कर्मचारी की गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि इतनी संवेदनशील दवा वार्ड तक कैसे पहुंची? हाई-अलर्ट दवाओं के इस्तेमाल में सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ? अगर दवा को लेकर कोई संदेह था तो डॉक्टर से पुष्टि क्यों नहीं की गई?

फिलहाल पुलिस और मेडिकल कॉलेज प्रशासन दोनों स्तरों पर मामले की जांच कर रहे हैं. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है. अब जांच रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस घटना में किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी.

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