केरल में घट रही जन्मदर, बढ़ रही मौतों की संख्या; हिंदू आबादी में लगातार गिरावट, ईसाई समुदाय भी प्रभावित

केरल में हिंदू और ईसाई समुदाय के लोगों के लिए परेशान करने वाली खबर है. राज्य के इकोनॉमिक्स और स्टैटिस्टिक्स डिपार्टमेंट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यहां इन दोनों धर्मों में मरने वाले लोगों की संख्या जन्म लेने वाले लोगों की संख्या से ज्यादा है. हिंदू और ईसाई समुदायों में ‘नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट’ (NGR) देखी जा रही है. यानि इन दोनों समुदायों की जनसंख्या प्राकृतिक रूप से घट रही है. यहां सिर्फ मुस्लिम समुदाय में अभी भी लोग ज्यादा जन्म ले रहे हैं, जबकि उनकी मौत की संख्या कम है. इसलिए पूरे केरल की जनसंख्या थोड़ी-बहुत बढ़ रही है. 

वहीं हिंदू और ईसाइयों में ये साल दर साल कम होती जा रही है. हिंदुओं में ये दूसरा साल है और ईसाइयों में तीसरा साल है जब उनकी संख्या घट रही है. आने वाले 15-20 साल में इसका ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. डेमोग्राफिक (जनसांख्यिकीय) विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में सभी समुदायों में जन्म दर लगातार घट रही है. ऐसे में 2041 के आसपास केरल की पूरी जनसंख्या घटने लगेगी. 

कितनी आई गिरावट?

नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट का मतलब है कि किसी समुदाय की मृत्यु दर उसकी जन्म दर से ज्यादा है, जिससे प्राकृतिक बदलावों के कारण ही जनसंख्या कम होने लगती है. हिंदुओं की NGR, जो पहली बार 2022 में नेगेटिव (-0.080%) हुई थी, 2023 में और खराब होकर -0.115% हो गई. वहीं ईसाई समुदाय 2021 (-0.095%) से ही नेगेटिव दायरे में है और 2023 में यह -0.084% तक पहुंच गया. यहां हिंदुओं और ईसाइयों की जनसंख्या घटती हुई रही है, वहीं मुस्लिम समुदाय की वजह से 2023 में केरल की कुल नेचुरल ग्रोथ रेट मामूली रूप से पॉजिटिव (0.249%) रही.

आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?

केरल में साक्षरता दर ज्यादा है. यहां पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का भी पढ़ाई-लिखाई और करियर पर बहुत ज्यादा फोकस है. यहां महिलाएं ज्यादा नौकरी कर रही हैं और लोग इस वजह से देर से शादी कर रहे हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग छोटा परिवार चाहते हैं. युवा केरल छोड़कर बाहर जा रहे हैं.

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