उद्धव गुट के बागी सांसदों पर सख्ती, जारी हुआ नोटिस; सदस्यता रद्द होने की चेतावनी

महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कुछ दिनों से गरमाई हुई है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) मुश्किल दौर से गुजर रही है. पार्टी में जारी अंदरूनी संकट अब खुलकर सामने आ गया है. इस एक बड़ी खबर सामने आई है. शिवसेना (UBT) ने अपने बागी सांसदों को व्हिप जारी होने के बाद भी बैठक में शामिल न होने को लेकर ‘शो-कॉज नोटिस’ जारी किया है. इसके लिए सभी सांसदों को 24 घंटे का समय दिया गया है. जानकारी के मुताबिक लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने अनुपस्थित सांसदों को औपचारिक ‘शो-कॉज नोटिस’ जारी किया है. इन सांसदों को अपने व्यवहार पर लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए 24 घंटे की सख्त डेडलाइन दी गई है. 

नोटिस में क्या कहा गया

इस नोटिस में साफ कहा गया है कि अगर तय समय के अंदर जवाब नहीं आता है, तो यह मान लिया जाएगा कि सांसदों ने पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है. इसके बाद उन पर संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई होगी. नोटिस में कहा गया है ‘पार्टी व्हिप मिलने के बावजूद मंगलवार (18 जून) को हुई लोकसभा सांसदों की बैठक में मौजूद न रहने के लिए ‘कारण बताओ’ नोटिस दिया जा रहा है. 16 जून को पार्टी का व्हिप जारी हुआ था. जिसमें बैठक को लेकर जानकारी दी गई थी. ये जानकारी सभी को ईमेल, वॉट्सऐप और दिल्ली स्थित आपके आवास पर भेजी गई थी. लेकिन आप लोग इस बैठक में शामिल नहीं हुए. न ही आप लोगों ने नहीं आना की वजह बताई. इसे पार्टी ने बहुत ही गंभीरता से लिया है. यह पार्टी व्हिप का उल्लंघन है. इसलिए यह ‘शो-कॉज़’ नोटिस जारी किया गया है’.

स्पष्टीकरण देने के लिए 24 घंटे का समय

अनिल देसाई ने कहा कि पार्टी के चीफ सेक्रेटरी के तौर पर वो यह ‘शो कॉज’ नोटिस जारी कर रहे हैं . उन्होंने कहा कि यह लेटर मिलने के चौबीस घंटे के अंदर इस पार्टी-विरोधी गतिविधियों के बारे में सांसदों को सफाई देने का निर्देश दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नोटिस के मिलने के चौबीस घंटे के अंदर आप लोगों को पार्टी-विरोधी व्यवहार के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा. अगर इस समय सीमा में उचित जवाब या स्पष्टीकरण नहीं मिला तो यह मान लिया जाएगा कि आपने अपनी मर्जी से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है. ध्यान रहे कि भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत आपके कामों के नतीजों के लिए आपको जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

‘ऑपरेशन टाइगर’

यह नोटिस ऐसे समय में आया है जब पार्टी आंतरिक चुनौतियों और दलबदल से जूझ रही है. दरअसल ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच UBT सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में बड़े पैमाने पर पलायन की आशंका से पार्टी संकट में है. गुरुवार को नई दिल्ली में पार्टी नेतृत्व की बुलाई संसदीय दल की बैठक में फूट खुलकर सामने आई.

बैठक में पहुंचे सिर्फ 3 सांसद

पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से सिर्फ तीन अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही बैठक में पहुंचे. बाकी 6 सांसद नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे गायब रहे.

संजय राउत ने कही ये बात

सांसदों की अनुपस्थिति के जवाब में UBT गुट ने तुरंत अपना दबदबा कायम करने की कोशिश की. पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बताया कि 6 अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और लोकसभा से उनकी अयोग्यता की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

एक कॉन्फ्रेंस में राउत ने कहा, ‘कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है. हम इन्हें अयोग्य घोषित कराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. यदि लोकसभा अध्यक्ष नियमों, कानून और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्य करते हैं तो ये लोग अयोग्य घोषित हो जाएंगे’.

MLC चंद्रकांत रघुवंशी का दावा

ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चा तब तेज हुई जब शिवसेना MLC चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि शिवसेना UBT के 6 सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भरोसा जताया है और उनके गुट में शामिल हो चुके हैं. इस दावे के बाद UBT खेमे में खलबली मच गई है. पार्टी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गई है और नोटिस के जरिए सांसदों पर दबाव बना रही है. अगर 6 सांसद शिंदे गुट में जाते हैं तो लोकसभा में UBT की ताकत 9 से घटकर सिर्फ 3 रह जाएगी.

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